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बीते पांच सालों में प्राइवेट बैंकों के NPA में हुई 450 फीसदी की बढ़ोतरी, टॉप पर है ये बैंक

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2018, 12:52 IST

फ़िलहाल बैंकिंग सेक्टर का संकट ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है. एक रिपोर्ट की मानें तो बीते पांच वर्षों में निजी बैंकों के फंसे हुए कर्ज (NPA) में 450 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2013-14 में बैंकों का NPA 19,800 करोड़ रुपये था जो मार्च, 2018 में 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

इन बैंकों में एक्सिस बैंक के NPA में इस दौरान सबसे अधिक (988 फीसदी) बढ़ोतरी हुई है. उसके NPA का आंकड़ा 3,146 से बढ़कर 34,249 करोड़ रु पहुंच गया.

 

सबसे अधिक NPA के मामले में ICICI 54,063 करोड़ रुपये के आंकड़े के साथ अन्य बैंकों से काफी आगे है. यह रकम निजी बैंकों के कुल NPA का करीब आधा हिस्सा है. इसके अलावा HDFC का कुल NPA वित्त वर्ष 2017-18 में 8607 करोड़, कोटक महिंद्रा का- 3835 करोड़, फेडरल बैंक-2796 करोड़, यस बैंक- 2627 करोड़ शामिल है.

निजी बैंकों में ICICI बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर को वीडियोकॉन बैंक ग्रुप को लोन मंजूर के मामले में आरोपों का सामना कर रही हैं.

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भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के फंसे हुए कर्जे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कॉर्पोरेट ऋण की है. आंकड़ों के मुताबिक यह हिस्सेदारी लगभग तीन चौथाई है. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. इसमें उद्योग जगत की हिस्सेदारी चार लाख 70 हजार करोड़ के करीब है. यह बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज का करीब 37 फीसदी है.

आंकड़ों के मुताबिक कर्ज में 22.83 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रीटेल सेक्टर में एनपीए का आंकड़ा केवल 3.71 फीसदी (23,795 करोड़ रु) है. इसके अलावा कृषि क्षेत्र में यह नौ फीसदी और सेवा क्षेत्र में 13.21 फीसदी है.

First published: 21 May 2018, 12:46 IST
 
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