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गुजरात के बंदरगाह पर गैस लेकर पहुंचा रूसी जहाज, सरकार ने बताया बड़ी उपलब्धि

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 June 2018, 17:24 IST

रूस ने सोमवार को भारत को अपनी पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की पहली शिपमेंट भेज दी है. भारत ने रूस के साथ एलएनजी को लेकर 20 साल का अनुबंध किया है. रूसी आपूर्तिकर्ता गज़प्रोम से कार्गो ले जाने वाले एलएनजी वाहक 'एलएनजी कानो' ने सोमवार को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर दस्तक दी. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे भारत के ऊर्जा कार्यक्रम के लिए 'सुनहरा दिन' बताया है.

उन्होंने कहा "भारत में रूस की लिक्विफाइड नेचुरल गैस लाना भारत के ऊर्जा सड़क मानचित्र में बड़ी उपलब्धि है." प्रधान ने कहा कि अनुबंध के अनुसार रूस सालाना 1.5 अरब डॉलर (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) के एलएनजी की आपूर्ति करेगा.

 

अपने पहले शिपमेंट में गैज़प्रॉम ने नाइजीरिया से 3.4 लाख करोड़ ब्रिटिश थर्मल इकाइयों की आपूर्ति की. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा उन्होंने कहा कि अनुबंध अवधि में भारत 25 अरब डॉलर (1.67 लाख करोड़ रुपये) के एलएनजी का आयात करेगा.

प्रधान ने कहा कि रूस से एलएनजी आयात ने विशेष रूप से तेल और गैस क्षेत्र में नई दिल्ली और मॉस्को के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया आयाम जोड़ा है. उन्होंने कहा कि सरकार भारत को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने की दिशा में प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक गैस बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए निवेश किए जा रहे हैं.

वर्तमान तेल की कीमतों पर एलएनजी के लिए रूसी दर 1.5 डॉलर (लगभग 100 रुपये) प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल इकाइयों की कीमत से कम है. ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका से एलएनजी की तुलना में रूसी आपूर्ति 1-1.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू सस्ता है.

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First published: 5 June 2018, 17:18 IST
 
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