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मंदी की मार: चीन के डिवेलपर्स भारत में लगा रहे पैसा

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 June 2016, 16:18 IST
QUICK PILL
  • भारत का रियल एस्टेट बाजार चीन और जापान के डिवेलपर्स के लिए मुफीद ठिकाने के तौर पर  उभर रहा है. चीन की कंपनियां जहां बड़े रिहायशी प्रोजेक्ट में निवेश कर रही हैं वहीं जापानी डिवेलपर्स औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश को तरजीह दे रहे हैं.
  • रियल एस्टेट में 100 फीसदी विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दिए जाने के बाद चीन की बड़ी कंपनी डालियान वांडा ग्रुप अगले एक दशक में चरणबद्ध तरीके से 10 अरब डॉलर का निवेश करेगी.
  • चीन की अर्थव्यवस्था में आई मंदी की वजह से वहां के डिवेलपर्स निवेश के लिए भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं. 

नकदी संकट और मांग की कमी से जूझ रही रियल एस्टेट इंडस्ट्री पटरी पर आती नजर आ रही है. देश का रियल एस्टेट चीन और जापान की कंपनी के लिए मुफीद निवेश स्थल बनता जा रहा है.

एफडीआई निवेश को आसान किए जाने, रिट की स्थापना, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के साथ सभी को 2022 तक किफायती आवासीय मुहैया कराए जाने की परियोजना समेत अन्य सुधार उपायों के बाद रियल एस्टेट इंडस्ट्री में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत परिदृश्य से भी रियल एस्टेट इंडस्ट्री में तेजी आने की उम्मीद है. 

रियल एस्टेट में 100 फीसदी विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दिए जाने के बाद चीन की बड़ी कंपनी डालियान वांडा ग्रुप अगले एक दशक में चरणबद्ध तरीके से 10 अरब डॉलर का निवेश करेगी.

भारत में किसी चीन की कंपनी की तरफ से किया गया यह सबसे बड़ा निवेश है. कंपनी साल की शुरुआत में हरियाणा सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुकी है. कंपनी हरियाणा सरकार के साथ मिलकर वांडा इंडस्ट्रियल न्यू सिटी का निर्माण करेगी. 

वांडा समूह के बाद चीन की अन्य कंपनियां भी भारत में निवेश की तैयारी कर रही है. चाइना फॉर्च्यून लैंड डिवेलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (सीएफएलडी) और हरियाणा सरकार बड़े औद्योगिक पार्क को बनाने की योजना पर काम कर रही है. 

वहीं एक और चीन की कंपनी गेजुबा ने सैद्धांतिक तौर पर तेलंगाना की सिंचाई परियोजना में 10,000 करोड़ रुपये निवेश करने की सहमति दी है.

चीन की बड़ी कंपनी डालियान वांडा ग्रुप अगले एक दशक में चरणबद्ध तरीके से 10 अरब डॉलर का निवेश करेगी

देश के आर्थिक परिदृश्य में हो रहे बदलाव के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि 2016 में कितनी कंपनियां निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करती हैं. 

जेएलएल इंडिया के कंट्री हेड अनुज पुरी के मुताबिक, 'चीन की अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है. वहां के डिवेलपर्स के लिए भारत ऐसा बाजार है जहां से उन्हें फायदा मिल सकता है. वांडा कंपनी का निवेश अभी तक का सबसे बड़ा निवेश है. 2015 में चीनी कंपनियों की तरफ से विदेशा में किए गए निवेश के मुकाबले भी यह सबसे बड़ी घोषणा है.'

साथ ही भारत के किसी रिहायशी और रिटेल एसेट में किसी विदेशी कंपनी की तरफ से किए जाने वाले बड़े निवेश में से एक है. रियल एस्टेट में विदेशी कंपनियों की बढ़ रही भागीदारी से आने वाले दिनों में प्रोजेक्ट की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है.

रियल एस्टेट विधेयक के पारित होने के बाद देश के रियल एस्टेट को लेकर विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी के विकल्प पर भी विचार कर रही हैं. 

चीनी कंपनियां व्यावसायिक परियोजनाओं के मुकाबले बड़ी रिहायशी परियोजनाओं में दिलचस्पी दिखा रही है. हालांकि आने वाले दिनों में उनके व्यावसायिक परिसंपत्तियों में निवेश की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.

वांडा की योजन अगले 10 सालों के दौरान इंडस्ट्रियल टाउनशिप, रिटेल और रेजिडेंशियल डिवेलपमेंट्स की परियोजनाओं में 10 अरब डॉलर निवेश करने की है. खबरों के मुताबिक परियोजना के पहले चरण की शुरुआत इसी साल होनी है. पहले चरण की परियोजना के अगले 3-5 साल में पूरा होने की उम्मीद है.

जापान से भी आएगा निवेश

चीन के साथ जापान भी भारत के रियल एस्टेट पर भरोसा दिखा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्च्न्नर की बड़ी परियोजनाओं में निवेश के मामले में जापान भारत का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है. जापान और चीन की प्राइवेट इक्विटी कंपनी भी भारत के रियल एस्टेट इंडस्ट्री में निवेश की योजना बना रही हैं.

चीन के उलट जापान की रियल एस्टेट कंपनियां रिहायशी प्रोजेक्ट के मुकाबले औद्योगिक प्रोजेक्ट में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं. उनकी योजना भारत की कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने की है. 

एक अनुमान के मुताबिक अगले तीन सालों में जापान से भारत के रियल एस्टेट बाजार में करीब 2 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है. 

जनवरी में किए गए रिक्स-जेएलएल सर्वे में 62 फीसदी कंपनियों और निवेशकों ने माना था कि 2016 में चीन और जापान भारत के रियल एस्टेट बाजार में दखल दे सकते हैं. 

First published: 16 June 2016, 16:18 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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