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भारत की FDI ग्रोथ पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची : रिपोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2018, 17:04 IST

भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) 2017-18 में 3% की गिरावट के साथ 44.85 अरब डॉलर पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया गया है. डीआईपीपी के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में एफडीआई केवल 3% बढ़कर 44.85 अरब डॉलर हो गया. 2016-17 में देश में विदेशी प्रवाह में 8.67%, 2015-16 में 29%, 2014-15 में 27 डॉलर और 2013-14 में 8% की वृद्धि हुई.

हालांकि 2012-13 में एफडीआई प्रवाह में 38% की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों के मुताबिक घरेलू निवेश को पुनर्जीवित करना और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश में नियमों को आसान बनाना बेहद जरूरी है. डिलोइट इंडिया के सहयोगी अनिल तलरेजा का कहना है कि उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्रों में एफडीआई की कम वृद्धि मुख्य के लिए एफडीआई नीति की अनिश्चितता और जटिलता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

 

उन्होंने कहा, "सरकार ने नियमों को आसान बनाने के काफी प्रयास किए लेकिन वैश्विक उपभोक्ता और खुदरा कंपनियां अभी भी भारत में निवेश करने के लिए निर्णय लेने में संकोच कर रही हैं." कारोबार करने में आसानी के चलते रैंकिंग को आगे बढ़ाने के मामले में भारत ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन भारत को अभी विदेशी निवेशकों में निवेश के लिए उत्साह पैदा करने में अभी मेहनत की जरूरत है.

साल 2013 के बाद वैश्विक फंडों का भारत को लेकर आकर्षण सबसे निचले स्तर पर चला गया है. इस आकर्षण के कम होने का प्रमुख कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रूपये में लगातार आ रही गिरावट है. आंकड़ों की माने तो दुनियाभर के उभरते बाजारों में किये जा रहे निवेश में से हर 100 डॉलर में से भारत का हिस्सा महज 9.5 डॉलर रह गया है, यह साल 2015 में 16 डॉलर से भी ऊपर था.

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First published: 1 July 2018, 17:04 IST
 
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