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विदेश में कमाई कर रहे भारतीय घर पैसा भेजने में सबसे आगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 April 2016, 13:51 IST
QUICK PILL
  • विदेश में कमाई कर रहे भारतीय लोगों ने 2015 में दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा कमाई की रकम अपने देश भेजी. भारतीयों ने पिछले साल कुल 69 अरब डॉलर की रकम देश भेजी.
  • विदेश में रहे भारतीयों की तरफ से भेजी जाने वाली रकम से भारत को अपना विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने में  भी मदद मिलती है.

विदेश में रह रहे भारतीय अन्य देशों के अपनी कमाई की रकम देश भेजने में सबसे आगे रहे हैं. 2015 में भारत में विदेश से सबसे ज्यादा पैसा आया. 

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों ने अपने देश 69 अरब डॉलर की रकम भेजी. हालांकि 2014 के मुकाबले भारतीयों की तरफ से अपने देश भेजी जाने वाली कमाई की रकम में 1 अरब डॉलर की गिरावट आई है. 

2014 के मुकाबले 2015 में भले ही  विदेश में रहे भारतीयों की तरफ से भेजी जाने वाली कमाई की रकम में कमी आई लेकिन इसके बावजूद भारत 2015 में सबसे ज्यादा पैसे आए. 

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ''माइग्रेन एंड डिवेलपमेंट ब्रीफ'' के मुताबिक 2014 में विदेश में रहे भारतीय लोगों ने अपने देश 70 अरब डॉलर की रकम भेजी थी.

दूसरे नंबर पर चीन

2015 में भारत के बाद चीन को सबसे ज्यादा विदेशी कमाई की रकम मिली. विदेश में काम कर रहे चीनी नागरिकों ने अपने देश कुल 64 अरब डॉलर की रकम भेजी जबकि तीसरे स्थान पर फिलीपीन रहा जहां के लोगों ने अपने देश 28 अरब डॉलर की रकम भेजी.

माइग्रेन एंड डिवेलपमेंट ब्रीफ के मुताबिक 2014 में विदेश में रहे भारतीय लोगों ने अपने देश 70 अरब डॉलर की रकम भेजी थी

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में सबसे ज्यादा लोगों ने पैसे भेजे लेकिन यह 2.1 फीसदी घटकर 68.9 अरब डॉलर हो गया. 2009 के बाद इसमें पहली बार गिरावट आई है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक  2015 में विकासशसील देशों को कुल 431.6 अरब डॉलर की रकम मिली जो 2014 के 430 अरब डॉलर के मुकाबले महज 0.4 फीसदी अधिक है. 

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक मंदी के बाद 2015 में बचत की कमाई अपने देशों में भेजने की दर में गिरावट आई है. 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक  2015 में विकासशसील देशों को कुल 431.6 अरब डॉलर की रकम मिली

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक बचत में 1.7 फीसदी की गिरावट आई है और यह 2014 के 592 अरब डॉलर से कम होकर 2015 में 581.6 अरब डॉलर हो गया. 

वर्ल्ड बैंक में ग्लोबल इंडिकेटर्स ग्रुप के डायरेक्टर अगस्तो लोपेज कार्लोस ने कहा, करोड़ों परिवारों के लिए विदेश से भेजा जाने वाला पैसा उनकी आय का  एक स्थायी स्रोत है. इसके साथ ही यह विकासशील देशों को उनका विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने में भी मददगार होता है.

First published: 14 April 2016, 13:51 IST
 
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