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'भ्रष्ट पूंजीवाद' के सूचकांक में भारत 9वें स्थान पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2016, 16:18 IST

पत्रिका 'द इकोनॉमिस्ट' के एक नये अध्ययन में 'क्रोनी कैप्टिलिज्म' सूचकांक में भारत को नौंवे स्थान पर रखा गया है. इस लिस्ट में रूस पहले नंबर पर है. क्रोनी कैपिटलिज्म यानि 'भ्रष्ट पूंजीवाद' में उद्योग, राजनीति और प्रशासन का गठजोड़ एक दूसरे के हितों को साधने का काम करता है. 2015 में भारत की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुअा है.

सूचकांक के अनुसार भारत में राजनीतिक सांठगांठ से जुड़े कारोबार की संपत्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत और इससे मुक्त क्षेत्रों के कारोबार की संपत्ति 8.3 प्रतिशत के बराबर है.  2014 में भी भारत इस सूचकांक में नौंवे स्थान पर था.

यह अध्ययन फोर्ब्स पत्रिका द्वारा प्रकाशित दुनिया के अरबपतियों व उनकी संपत्ति की सूची के आंकड़ों पर आधारित है.  सूचकांक में सांठ-गांठ वाले क्षेत्रों की संपत्ति के जीडीपी में 18 प्रतिशत हिस्से के साथ रूस सबसे ऊपर है.

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इसके बाद मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, यूक्रेन, मेक्सिको, इंडोनेशिया और तुर्की का स्थान है. भारत के बाद दसवें नंबर पर ताइवान और 11 वें नंबर पर चीन का नंबर आता है.

रूस के साथ ही मलेशिया, फिलीपींस और सिंगापुर की जीडीपी में 10 फीसदी से ज्यादा पूंजी क्रोनी सेक्टर की है.

'द इकोनॉमिस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार 2004 और 2014 के बीच राजनीतिक साठगांठ से प्रभावित व्यवसायों के अरबपतियों की संपत्ति 385 प्रतिशत बढ़ कर 2,000 अरब डॉलर हो चुकी है.

इस सूचकांक में 22 देश शामिल हैं, जिसमें जर्मनी में 'पूंजीवाद' को पाक साफ बताया है. 22 देशों के इंडेक्स में जर्मनी सबसे निचले पायदान पर है.

जर्मनी की जीडीपी में अरबपतियों का योगदान 13.9 फीसदी है जिसमें से 13.7 प्रतिशत हिस्सा गैर क्रोनी सेक्टर का है.

First published: 21 May 2016, 16:18 IST
 
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