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भारत के जीडीपी आंकड़ों पर अब अमेरिका ने उठाया सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 July 2016, 22:41 IST

अमेरिका विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की 7.5 प्रतिशत आर्थिक विकास दर बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हो सकती है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि नरेंद्र मोदी सरकार आर्थिक सुधारों के अपने वादों को पूरा करने की दिशा में धीमी रही है. हालांकि, उसने नौकरशाही और एफडीआई क्षेत्र में रुकावटों को कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों की प्रशंसा की है.

दो दिन पहले ही मॉर्गन स्टेनली के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार रुचिर शर्मा ने भारत के आर्थिक वृद्धि के दावों पर संदेह जाहिर किया था. रुचिर शर्मा ने कहा कि भारत के जीडीपी आंकड़ों को ‘बढ़ा-चढ़ाकर’ दिखाया गया है.

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आपको बता दें कि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.9 फीसदी रही. वित्त वर्ष 2015-16 में जीडीपी दर 7.6 फीसदी रही, जो कि आधिकारिक अनुमान के मुताबिक ही है. 2014-15 में देश की जीडीपी 7.2 फीसदी रही थी.

अमेरिकी विदेश विभाग के आर्थिक एवं कारोबार ब्यूरो की इस रिपोर्ट में कहा गया, "स्पष्ट रूप से भारत विश्व की सबसे अधिक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, लेकिन निवेशकों के रुझान में नरमी से संकेत मिलता है कि करीब 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर वास्तविकता से अधिक बताई गई हो सकती है.”

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अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार कई प्रस्तावित सुधारों को संसद में पारित होने के लिए संघर्ष करना पड़ा. इस वजह से एनडीए सरकार के समर्थन में आगे आए कई निवेशक पीछे हट रहे हैं. मोदी सरकार संसद में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर पर्याप्त समर्थन हासिल करने में नाकाम रही और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर विपक्षी दलों के साथ अभी भी विचार-विमर्श चल रहा है.

First published: 6 July 2016, 22:41 IST
 
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