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आखिर वित्त वर्ष 2018 में भारत से होने वाला कार एक्सपोर्ट इतना क्यों गिर गया ?

सुनील रावत | Updated on: 11 April 2018, 15:27 IST

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक बीते मार्च महीने में यात्री कार निर्यात में 6.7 फीसदी की गिरावट आयी है. जबकि पूरे वित्त वर्ष 2018 में यह ड्रॉप 3.8 फीसदी रहा. इस साल दो कार सेगमेंट वैन और यूटिलिटी और यात्री वाहन (पीवी) के निर्यात में 1.5% की कमी शामिल है.

घरेलू बिक्री की तुलना में यह निर्यात बेहद कम रहा. घरेलू बिक्री बढ़ रही है लेकिन भारत को ऑटोमोबाइल निर्यात केंद्र बनाने के उद्देश्य को पूरा करने के लिहाज से यह निर्यात कम नहीं है. 2016 से 2026 के लिए ऑटोमोटिव मिशन प्लान का उद्देश्य वाहन के निर्यात को पांच गुना बढ़ाना है. इसके अलावा वित्त वर्ष 2016 में 16 फीसदी की वृद्धि को छोड़कर, पिछले पांच वर्षों के दौरान कार निर्यात सिंगल अंकों में बढ़ा है.

कारों की घरेलू मांग में बढ़ोतरी 

हालांकि भारत से निर्यात कमी के पीछे एक आंतरिक कारण घरेलू बिक्री का बढ़ना भी है. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की ही बात करें तो वह देश में उत्पादित हर दो कारों में से एक को बेचता है. चिंता का एक कारण यह है कि कुछ ग्लोबल मनुफक्चरर्स ने अपनी निर्यात रणनीतियों का पुनर्गठन किया है. उदाहरण के लिए हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड, जो 120 देशों में निर्यात करती थी, अब तक केवल 88 में कर रही है.

इस कोरियाई कंपनी ने तुर्की और चेकोस्लोवाकिया में अपनी फैक्ट्रियों से कुछ यूरोपीय बाजारों के साथ अपने निर्यात का पुनर्गठन किया है. इसके बाद से भारत से हुंडई के निर्यात में 7.9 फीसदी की गिरावट आई है. इसी तरह निसान के निर्यात में भी बीते वित्त वर्ष के दौरान बड़ी गिरावट आयी है. हालांकि इन सबसे में एकमात्र अपवाद फोर्ड मोटर इंडिया लिमिटेड है जिनके निर्यात में बीते साल 14 फीसदी की वृद्धि हुई है.

विश्लेषकों का मानना है कि शायद कुछ विकसित बाजारों में सेडान और कॉम्पैक्ट कारों पर कॉम्पैक्ट यूटिलिटी वाहनों की बढ़ती वरीयता कार निर्यात में तेज गिरावट का कारण हो सकती है. सियाम के आंकड़ों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2017 के दौरान अमेरिका में पीवी की बिक्री 11.9% कम थी और पिछले साल की तुलना में यूके में 5.1% कम थी. इन क्षेत्रों में मौजूदा डीजल मॉडल से भी बदलाव आ रहा है.

पर्यावरण के अनुपालन के मुद्दे शायद इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्राथमिकता देते हैं, जो अभी तक भारत में लागू हो पाया है. सियाम का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019 में वैश्विक रिकवरी की रफ्तार बढ़ने की संभावना है. इससे निर्यात में मदद करनी चाहिए, जो जीएसटी पर भी असर डालती है.

First published: 11 April 2018, 15:24 IST
 
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