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अच्छे नहीं हैं भारत में कपड़ा उद्योग के हाल, लगातार घट रहा है एक्सपोर्ट

सुनील रावत | Updated on: 26 March 2018, 12:39 IST

एक वक़्त में भारत में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला कपडा उद्योग क्या मुश्किलों का सामना कर रहा है. ताजा रिपोर्ट की मानें तो फरवरी 2018 में वस्त्र निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 10.25 फीसदी की कमी आई है. वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के मुताबिक बीते महीने वस्त्र निर्यात केवल 9400 करोड़ रुपये का रहा. जबकि फरवरी 2017 में यह 10,400 करोड़ रुपये था.

उदाहरण के तौर पर तिरुपुर शहर कारोबार का स्वर्ग कहा जाता था. यहां पूरे देश में अकुशल लोग भी नौकरी के लिए आते थे. यह भारत का सबसे बड़ा बने हुए कपडे का निर्यात सेंटर था और यहां मांग हमेशा ज्यादा रहती थी. लेकिन अब यहां युवा उद्यमी आत्महत्या कर रहे हैं.

तिरुपुर के संकट का कारण आंतरिक और बाहरी दोनों हैं. भारत को बीते कुछ सालों से बांग्लादेश और वियतनाम देशों जैसे मजबूत टक्कर मिल रही है. इसके अलावा द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों के नए युग में दक्षिण और पूर्वी एशिया के देशों में सबसे बड़े निर्यात बाजारों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने की दौड़ चल रही है, ऐसे में भारत कमजोर पड़ चुका है.

बांग्लादेश ने पहले ही यूरोपीय संघ के साथ एक एफटीए पर हस्ताक्षर किये हैं. जिसने उन्हें भारत से 10.5% लागत का लाभ दिया है. इसी तरह, वियतनाम वर्तमान में ईयू के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है और पहले से ही ट्रांस-पैसेफिक साझेदारी का हिस्सा है.

इससे पहले तिरुपुर के निर्यातकों संकट के समय में जोरदार साहस दिखाया. 2008 की मंदी के दौर से भी तिरुपुर अच्छी तरह निपटा. लेकिन  नोटबंदी ने ने पूरी तरह से घरेलू मांग को कम कर दिया. जीएसटी ने न कीमतों को बढ़ाया बल्कि सामग्री, सेवाओं की कीमत में भी वृद्धि की.

जीएसटी लागू होने से पहले एक्सपोर्ट इंसेंटिव एफओबी मूल्य का 13.64  फीसदी था. जबकि जीएसटी के बाद, यह 8% तक गिर गया. केन्द्र ने वादा किया था कि 90% जीएसटी को निर्यात की तारीख से 9 दिनों के भीतर रिफंड कर दिया जाएगा लेकिन यह वादा अभी भी लागू नहीं किया गया है.

First published: 26 March 2018, 12:37 IST
 
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