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भारत का बाहरी कर्ज पहुंचा 543 अरब डॉलर के पार, ये रहा कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 June 2019, 11:12 IST

 

भारत का बाहरी ऋण ( external debt) वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत बढ़कर प्रतिशत बढ़कर 543 अरब डॉलर हो गया. इसका मुख्य कारण वाणिज्यिक कर्ज और एनआरआई के जमा में वृद्धि होना बताया गया है. इस कर्ज में सबसे बड़ी हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की है. जिसकी मार्च 2019 के अंत में 50.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी. इसमें रुपया (35.7प्रतिशत), जापानी येन (5.0 प्रतिशत), और यूरो (3.0 प्रतिशत) शामिल है.

हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को कहा बाहरी ऋण में वृद्धि आंशिक रूप से मूल्यांकन लाभ से हुई है. जिसके परिणामस्वरूप रुपये और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की वेल्यू बढ़ी है." मार्च 2019 के अंत में भारत का बाह्य ऋण 543 बिलियन डॉलर था, जो वर्ष-दर-वर्ष 13.7 बिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज करता है.

केंद्रीय बैंक ने कहा, "वैल्यूएशन प्रभाव को छोड़कर मार्च 2018 के अंत में मार्च 2019 के अंत में बाहरी कर्ज में 13.7 बिलियन डॉलर के बजाय 30.4 बिलियन डॉलर की वृद्धि होगी." मार्च 2019 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात का बाहरी ऋण 19.7 प्रतिशत पर था, जो मार्च 2018 के अंत में अपने 20.1 प्रतिशत के स्तर से कम था. आरबीआई के अनुसार मार्च 2019 के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार के लिए अल्पकालिक ऋण का अनुपात बढ़कर 26.3 प्रतिशत हो गया, जबकि मार्च 2018 के अंत में यह 24.1 प्रतिशत था.

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First published: 29 June 2019, 11:08 IST
 
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