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'मोदी' के कारनामे से तबाह हो सकता है देश का ज्वैलरी कारोबार, जा सकती हैं हजारों नौकरियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 November 2018, 12:22 IST

भारत के ज्वैलरी एक्सपोर्टर इस साल गहरी निराशा से गुजर रहे हैं. निर्यातकों ने इस साल विदेशी बिक्री में कमी आने की उम्मीद की है. एक्सपोर्टर को डर है कि खरीदार उनके प्रतिद्वंद्वियों चीन और थाईलैंड का रुख कर सकते हैं. नीरव मोदी के बैंक धोखाधड़ी के बाद ज्वैलर्स अपने कारोबार के लिए क्रेडिट पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

पिछले हफ्ते नई दिल्ली स्थित पीसी ज्वेलर लिमिटेड ने कहा कि वह इस वित्तीय वर्ष अपने लगभग एक चौथाई निर्यात को कम करने की योजना बना रहा है क्योंकि वह मुख्य रूप से क्रेडिट-आधारित सेगमेंट से बिक्री से बचना चाहता है.

 

जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल के मुताबिक, भारत के जेम एंड ज्वैलरी का निर्यात, जो देश के कुल व्यापार शिपमेंट्स का 16 प्रतिशत वैश्विक बाजारों में हैं, सात महीने में लगभग 2 प्रतिशत गिर चुका हैं. मार्च के अंत तक यह 5 प्रतिशत घटकर 41 अरब डॉलर हो गए.

लगभग 6,500 निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार द्वारा समर्थित परिषद के उपाध्यक्ष कॉलिन शाह के मुताबिक "आजकल बैंक दो हर क्रेडिट एप्लिकेशन को दो-दो चश्मों से देखते हैं. उन्होंने कहा इस कठिनाइयों के साथ-साथ अगली दो तिमाहियों में कई नौकरियां सकती हैं और ग्राहक चीन और थाईलैंड में स्थानांतरित हो सकते हैं.

अखिल भारतीय मणि और आभूषण घरेलू परिषद, एक राष्ट्रीय व्यापार संघ के अध्यक्ष नितिन खंडेलवाल के अनुसार, देश भर में क्रेडिट की मुश्किल बढ़ रही है.उन्होंने कहा, "बैंक ज्वैलर्स से अपनी क्रेडिट सीमा और जोखिम को कम करने के लिए कह रहे हैं. "मैं समझने में असफल रहा कि यह सबसे बड़ा रोजगार पैदा करने वाला उद्योग क्यों है और सकल घरेलू उत्पाद में 6-7 प्रतिशत योगदान देता है."

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First published: 26 November 2018, 12:21 IST
 
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