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2040 तक भारत को हर साल होगी इतने तेल की जरूरत, कीमतें कर सकती हैं परेशान

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 September 2018, 14:17 IST

2040 तक भारत की कच्चे तेल की मांग प्रति वर्ष 500 मिलियन टन तक बढ़ने का अनुमान है, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी विकास की दर के लिए कमजोर हो सकती है. इंडियन ऑयल कॉर्प के एक कार्यकारी निदेशक पार्थ घोष ने मंगलवार को कहा कि यह 2017 में लगभग 4.7 मिलियन बीपीडी से लगभग 10 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) के बराबर होगा.

घोष ने सिंगापुर में एशिया प्रशांत पेट्रोलियम सम्मेलन (एपीईसीई) के दौरान कहा कि 2040 तक वैश्विक स्तर पर तेल की मांग 15.8 मिलियन बीपीडी बढ़ जाएगी. घोष ने कहा कि 2030 के वित्तीय वर्ष तक भारत की रिफाइनरिन्ग क्षमता प्रति वर्ष लगभग 439 मिलियन टन हो जाएगी क्योंकि नई और मौजूदा रिफाइनरियां अपने बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी कर रही हैं. जबकि इसी अवधि में घरेलू मांग प्रति वर्ष 356 मिलियन टन बढ़ने का अनुमान है. हाई रिफाइनिंग क्षमता का अर्थ यह होगा कि भारत इस क्षेत्र के देशों को अधिक तेल उत्पादों का निर्यात कर सकता है.

हालांकि तेल मांग की वृद्धि दर 2024 से 2025 तक धीमी हो जाएगी. घोष ने कहा, "विकल्प और ऊर्जा दक्षता से तेल की मांग को कम करने की उम्मीद है, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि परेशानी का कारण हो सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था तेल की कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील है. ऐसा कहा जाता है कि 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 0.2 से 0.3 प्रतिशत की कमी आई है''.

भारत ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इससाल नवंबर ईरान पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की घोषणा की है. हालांकि उन्होंने कहा भारत तेल का प्रबंधन करने में सक्षम हो जाएगा, भले ही अमेरिका उसे छूट दे या नहीं. भारतीय रिफाइनरियां काफी बहुमुखी हैं.

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First published: 25 September 2018, 14:09 IST
 
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