Home » बिज़नेस » India’s Quality Of Growth Improving: CRISIL
 

क्रिसिल: मौजूदा आर्थिक सुधारों और खामियों को ठीक करने से अर्थव्यवस्था लंबे समय के लिए मजबूत होगी

अभिषेक पराशर | Updated on: 11 July 2016, 18:13 IST
QUICK PILL
  • नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले दो साल के कामकाज की सराहना करते हुए रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि सुधार और खामियों को दुरुस्त करने की कोशिशों से छोटे और लंबे समय में भारत की आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा.
  • क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने मौद्रिक और राजकोषीय मदद से भी ग्रोथ को बढ़ाने की कोशिश नहीं की बल्कि उसने सिस्टम में मौजूद खामियों को दुरुस्त करते हुए ढांचागत सुधारों को आगे बढ़ाकर इसे पूरा करने की कोशिश की.
  • मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.9 फीसदी रहने की उम्मीद है. पिछले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.6 फीसदी थी.

नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले दो साल के कामकाज की सराहना करते हुए रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि सुधार और खामियों को दुरुस्त करने की कोशिशों से छोटे और लंबे समय में भारत की आर्थिक वृद्धि में और सुधार होगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट में क्रिसिल ने कहा कि सबसे बड़ा सुधार यह है कि सरकार ने अपनी नीतियों को तय करने के दौरान लोकलुभावन उपायों का ध्यान नहीं रखा. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने मौद्रिक और राजकोषीय मदद से भी ग्रोथ को बढ़ाने की कोशिश नहीं की बल्कि उसने सिस्टम में मौजूद खामियों को दुरुस्त करते हुए ढांचागत सुधारों को आगे बढ़ाकर इसे पूरा करने की कोशिश की.

मौजूदा वित्त वर्ष में भरतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.9 फीसदी रहने की उम्मीद है. पिछले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.6 फीसदी थी. 

हालांकि मानसून के खराब होने की स्थिति में वृद्धि दर पटरी से उतर सकती है. लगातार दो बार सूखे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था की आस बेहतर मानसून पर टिकी है. मौसम विभाग ने हालांकि इस बार उम्मीद से ज्यादा मानसून की भविष्यवाणी की है.

क्रिसिल ने कहा कि सरकार मौद्रिक और राजकोषीय नीति की मदद से इकनॉमिक साइकिल को गति दे सकती है या फिर वह सुधारों की मदद से टिकाऊ ग्रोथ को आगे बढ़ा सकती है. 

लगातार दो बार सूखे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था की आस बेहतर मानसून पर टिकी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार की राजकोषीय नीति कच्चे तेल की कम कीमतों पर आधारित रही है जो की दूरदर्शी नीति साबित हुई है. सरकार की योजना खर्च को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की रही है. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने समग्र तौर पर घाटे को काबू में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ाया है. साथ ही मौद्रिक नीति का पूरा ध्यान महंगाई को कम और नियंत्रित रखने पर केंद्रित है.

टिकाऊ ग्रोथ

रिपोर्ट बताती है कि चीन के उलट भारत की आर्थिक वृद्धि क्रेडिट क्रिएशन की वजह से नहीं बनी है. पिछले दो सालों में घरेलू स्तर पर क्रेडिट ग्रोथ की औसत वृद्धि दर 9.8 फीसदी रही है.

इलेक्ट्रिसिटी और बैंकिंग सेक्टर में सुधार के लिए कई उपायों की शुरुआत की गई है लेकिन अभी इन पर काम किया जाना है. सरकार इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड- 2016 और आधार बिल को पास करवाने में भी सफल रही है.

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड- 2016 की मदद से दीवालिया होने के मामलों को तेजी से निपटाया जा सकेगा और साथ ही इस प्रक्रिया में शेयरधारकों को कम नुकसान होगा. जबकि आधार बिल की मदद से सब्सिडी, ग्रामीण वेज और पेंशन को इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिये वितरित करने में मदद मिलेगी. 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, 'ग्रोथ की गुणवत्ता पर फोकस और सुधार एवं खामियों को दुरुस्त करने की कोशिशों का मतलब यह है कि इसका तत्काल फायदा नहीं दिखेगा. लेकिन अगर इसे बिना रुके जारी रखा गया तो यह भारत की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद देंगे और यह साइक्लिकल ग्रोथ नहीं होगी.'

First published: 11 July 2016, 18:13 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी