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कामकाजी महिलाओं के मामले में अब सीरिया और इराक जैसे देश ही भारत से पीछे हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2019, 13:31 IST

 

नए आधिकारिक आंकड़ों की माने तो अब सीरिया और इराक सहित दुनिया भर के सिर्फ नौ देशों में भारत की तुलना में कामकाजी महिलाओं का अनुपात कम है. अगर बिहार एक अलग देश होता, तो इसमें दुनिया की कामकाजी महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे कम होती. काम करने वाली शहरी महिलाओं में घरेलू सफाई का काम दूसरा सबसे आम पेशा है. एनएसएसओ द्वारा प्रकाशित श्रम बल सर्वेक्षण में इस बात की पुष्टि की गई है.

भारत में महिलाओं की भागीदारी 2017-18 में 23.3% के ऐतिहासिक निम्न स्तर तक गिर गई है, जिसका अर्थ है कि भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु की चार में से तीन महिआएं न तो काम कर रही हैं और न ही काम चाहती हैं. (15 वर्ष की आयु अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा वैश्विक तुलना के लिए उपयोग की जाने वाली कट-ऑफ है) .

 

इसका अर्थ यह होगा कि सबसे अधिक संभावना है कि वे घर चला रही हों और बच्चों की देखभाल कर रही हों. भारत का निम्न LFPR पहले से ही चिंता का विषय था और विश्व स्तर पर देश को नीचे से 12 वें स्थान पर रखा था. पुरुषों में जाति और धर्म भागीदारी का जॉब में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है लेकिन महिलाओं में मुस्लिम महिलाओं में सबसे कम LFPR है जबकि हिंदू महिलाओं में अगड़ी जाति की महिलाओं के पास सबसे कम LFPR है.

जिसका अर्थ है कि सामाजिक मानदंड और धार्मिक रूढ़िवाद महिलाओं को काम करने की अनुमति" होने में भूमिका निभा सकते हैं. भारतीय राज्यों में बिहार में महिला कर्मचारियों की भागीदारी की दर सबसे कम है, जबकि दक्षिणी और पूर्वी राज्य बेहतर प्रदर्शन करते हैं.रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी महिलाओं के लिए सबसे आम नौकरियां कपडा श्रमिकों, घरेलू सफाईकर्मियों के रूप में हैं.

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First published: 10 June 2019, 13:31 IST
 
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