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वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम: भारत दुनिया में 39वीं सबसे प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(डब्लूईएफ)

भारत विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम) के वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक में 16 अंक की छलांग लगाकर 39वें स्थान पर पहुंच गया है. कारोबारी जटिलताओं तथा वस्तु बाजार दक्षता में सुधार से भारत की रैंकिंग सुधरी है. पिछले साल भारत इस सूची में 55वें स्थान पर था. चीन इस सूची में 28वें स्‍थान पर है. रूस 43वें, दक्षिण अफ्रीका 47वें और ब्राजील 81वें स्‍थान पर है. 

लगातार आठवीं बार स्विट्जरलैंड सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इस सूची में सिंगापुर दूसरे तथा अमेरिका तीसरे स्थान पर है. विश्‍व आर्थिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार लगातार दूसरे वर्ष भारत 138 देशों की सूची में सोलह स्‍थान ऊपर आया है. 

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ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों में भारत पड़ोसी चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. चीन इस सूची में 28वें स्थान पर है. इंडेक्स में भारत के अंक 4.52 रहे, जबकि पहले स्थान पर रहने वाले स्विट्जरलैंड के 5.81 अंक थे. सूची में नीदरलैंड चौथे, जर्मनी पांचवें, स्वीडन छठे, ब्रिटेन सातवें, जापान आठवें, हांगकांग नौवें तथा फिनलैंड दसवें स्थान पर है.

इस साल सूची में 138 अर्थव्यवस्थाओं की प्रतिस्पर्धा को परखा गया है. साल 2015-16 की सूची में 140 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था. इससे पहले भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूची 2014-2015 में 71वें जबकि 2013-2014 की सूची में 60वें स्थान पर रहा था.

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वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट को विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक और  कार्यकारी अध्यक्ष क्लाउस श्वाब द्वारा वर्ष 1979 में शुरू किया गया था. वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट (जीसीआर) विश्व आर्थिक मंच द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक रिपोर्ट है. 

वर्ष 2004 से वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक के आधार पर संबंधित देशों की रैंकिंग तय करती है. यह रिपोर्ट संबंधित देशों द्वारा अपने नागरिकों की समृद्धि के उच्च स्तर प्रदान करने की क्षमता का आकलन करती है.

वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट को 12 श्रेणियों के आधार पर तैयार किया जाता है. इन श्रेणियों में संस्थान, बुनियादी ढांचा, व्यापक आर्थिक वातावरण, स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण, माल बाजार दक्षता, श्रम बाजार दक्षता, वित्तीय बाजार का विकास, तकनीकी तत्परता, बाजार का आकार, व्यापार जटिलता और नए विचार शामिल हैं.

First published: 28 September 2016, 3:00 IST
 
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