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विकासशील नहीं निम्न-मध्यम आय वाला देश होगा भारत

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • विश्व बैंक की बदली परिभाषा के बाद भारत विकासशील देशों की सूची से फिसलकर निम्न-मध्यम आय वर्ग वाले देश के नाम से जाना जाएगा.
  • वर्ल्ड डिवेलमेंट इंडेक्स में विश्व बैंक ने विकासशील और विकसित देशों की श्रेणी को खत्म कर दिया है. इसके बाद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक तरह की अर्थव्यवस्था वाले देश होंगे, जिन्हें निम्न-मध्यम आय वाले  देशों में रखा जाएगा.
  • विश्व बैंक ने यूरोप के सभी देश, उत्तरी अमेरिकी देशों, जापान, ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड को विकसित देशों की सूची में रखा है.

अभी तक आर्थिक स्थिति और जीवन यापन के स्तर के आधार पर देशों की अर्थव्यवस्था को विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्था में बांट कर देखा जाता था. लेकिन अब विश्व बैंक देशों की अर्थव्यवस्था को मापने के आधार में बदलाव करने जा रहा है. 

विश्व बैंक की बदली परिभाषा के बाद भारत विकासशील देशों की सूची से फिसलकर निम्न-मध्यम आय वर्ग वाले देश के नाम से जाना जाएगा. 

अभी तक कम और मध्यय आय वाले देशों को विकासशील देशों की श्रेणी में रखा जाता था. जबकि अधिक आय वाले देशों को विकसित देशों में शुमार कियाा जाता रहा है.

वर्ल्ड डिवेलमेंट इंडेक्स में विश्व बैंक ने विकासशील और विकसित देशों की श्रेणी को खत्म कर दिया है.  इसके बाद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक तरह की अर्थव्यवस्था वाले देश होंगे, जिन्हें निम्न-मध्यम आय वाले  देशों में रखा जाएगा. 

वहीं चीन, मैक्सिको और ब्राजील को मजबूत मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है. मलावी को इस सूची में सबसे नीचे जगह दी गई है. मलावी को बेहद न्यूनतम आय वाले देश के तौर पर जाना जाएगा. 

बदली परिभाषा के पहले तक यह सभी देश विकासशील देश के तौर पर ही जाने जाते थे. विश्व बैंक का कहना है कि मलावी की प्रति व्यक्ति आय 250 डॉलर प्रति व्यक्ति है और उसे मैक्सिको के बराबर वाली श्रेणी में जगह नहीं दी जा सकती, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 9,860 व्यक्ति प्रति डॉलर है.

विश्व बैंक के बदले पैमाने में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बराबर होगी भारतीय इकनॉमी

विश्व बैंक ने नई श्रेणी तैयार करते वक्त प्रति व्यक्ति आय के अलावा और भी कई कारकों का ध्यान रखा है. बैंक ने कारोबार शुरू करने के लिए जरूरी दिन, मातृ मृत्यु दर, जीडीपी के मुकाबले शेयर बाजार पूंजीकरण, सरकार की तरफ से जमा किए गए कर, बिजली उत्पादन और सैनिटेशन समेत अन्य कारकों को आधार बनाते हुए नई रैंकिंग दी है.

रैंकिंग में सबसे ऊपर कारोबार शुरू करने का पैमाना है. जून 2015 में भारत में बिजनेस शुरू करने के लिए  कम से कम 29 दिन लगे जबकि वैश्विक तौर पर यह औसत 20 दिनों का है.

भारत में 2015 में प्रति 100,000 पर मातृ मृत्यु दर 174 रहा जो वैश्विक औसत से कहीं बेहतर है. 2015 में वैश्विक मातृ मृत्यु दर का औसत 216 है. 

2014 में जीडीपी के मुकाबले भारत के शेयर बाजार का पूंजीकरण 76 फीसदी रहा जो वैश्विक औसत 94 फीसदी से कम है. 

विश्व बैंक के मुताबिक मजदूर भागीदारी दर, बिजली  उत्पादन और सैनिटेशन सुविधाओं तक पहुंच के मामले में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर के मुकाबले खराब है लेकिन उसने मातृ मृत्यु दर को काबू में किए जाने की दिशा में जबरदस्त तरक्की की है. 

2015 में जहां महज 40 फीसदी भारतीयों की पहुंच सैनिटेशन सुविधाओं तक रही वहीं वैश्विक तौर पर यह आंकड़ा 68 फीसदी का है.

नए नियमों के मुताबिक विश्व बैंक ने यूरोप के सभी देश, उत्तरी अमेरिकी देशों, जापान, ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड को विकसित देशों की सूची में रखा है. बाकी के इलाकों को विकासशील देशों की सूची में रखा गया है. 

विश्व बैंक ने यूरोप, उत्तरी अमेरिकी देशों, जापान, ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड को विकसित देशों की सूची में रखा है

विश्व बैंक के इस नए नामाकरण के बाद माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र भी देशों की रैंकिंग में बदलाव कर सकता है. फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की विकासशील देशों की कोई परिभाषा नहीं है. 

संयुक्त राष्ट्र 159 देशों को विकासशील देश मानता है, जिसमें भारत और चीन भी शामिल हैं. वहीं जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के सभी देशों को विकसित देश माना जाता है.

First published: 31 May 2016, 4:53 IST
 
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