Home » बिज़नेस » Catch Hindi: indian government new policy for start ups will help
 

सरकार की नई नीति से मिल पाएगी भारतीय स्टार्ट-अप को किक?

नीरज ठाकुर | Updated on: 17 January 2016, 19:22 IST

केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था की बेहतरी में स्टार्ट-अप की भूमिका देखते हुए शनिवार को उसे बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की. इस नीति के प्रमुख बिंदु निम्न हैं:

  • श्रम और पर्यावरण मंत्रालय में स्व-प्रमाणन की व्यवस्था यानी स्टार्ट-अप की तीन साल जांच नहीं की जाएगी.
  • पेटेंट शुल्क में 80 फीसदी तक की कमी.
  • भारत सरकार भारतीय एंटरप्रेन्योर को पेटेंट का दावा करने में मदद करेगी.
  • स्टार्ट-अप शुरू करने में मदद के लिए 10 हज़ार करोड़ का कोष.
  • हर साल 500 करोड़ रुपये तक का क्रेडिट गारंटी कोष.
  • तीन साल तक आयकर से छूट.
  • संपत्ति की बिक्री पर टैक्स में छूट बशर्ते उस पैसे को स्टार्ट-अप में निवेश किया गया है.
  • कारोबार में विफल हो जाने पर 90 दिन के अंदर स्टार्ट-अप बंद करना.

भारत में 4,200 स्टार्ट-अप हैं. साल 2020 तक इनकी संख्या करीब 11,500 हो जाने की उम्मीद है

कारोबारी जगत ने सरकार की नई नीति का स्वागत किया है. ग्रांट थॉर्नटन कंपनी के पार्टनर एचवी हरीश कहते हैं, "ये अच्छी बात है कि सरकार ने ये महसूस किया कि स्टार्ट-अप के लिए नियमित कारोबार से अलग तरह के नियम और सिस्टम की जरूरत होती है."

पढ़ेंः 'स्टार्ट अप इंडिया से लाइसेंस राज का खात्मा होगा'

हरीश मानते हैं कि सरकार ने विफल स्टार्ट-अप को 90 दिनों के अंदर बंद करने की सुविधा देकर बहुत अच्छा कदम उठाया है.

वो कहते हैं, "स्टार्ट-अप के विफल होने की बहुत ज्यादा आशंका रहती है. 90 फीसदी स्टार्ट-अप विफल हो भी जाते हैं. ऐसे में अगर सरकार उन्हें आसानी से बिजनेस बंद करने की सहूलियत देगी तो ज्यादा लोग खतरा उठाएंगे."

<a href=Arun Jaitley">

विजय वर्मा/पीटीआई

साल 2015 भारतीय स्टार्ट-अप के लिए काफी उत्साहवर्धक रहा. हालांकि लंदन स्थित सलाहकार संस्था ग्रोएनेब्लर के अनुसार बीते साल भारत के 20 स्टार्ट-अप के 3270 कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.

डेलॉयटे के निदेशक रोहित भाटियानी भी सरकार की पहल का स्वागत करते हैं. रोहित कहते हैं, "भारत में स्टार्ट-अप के पिछड़ने के लिए कई कारण हैं. अब जाकर सरकार ऐसी नीति लायी है जो स्टार्ट-अप को ध्यान में रखकर बनायी गयी है. इससे भारत में नए कारोबारी और एंटरप्रेन्योर उभरेंगे."

जहां ज्यादातर लोग सरकार की पहल की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोगों को लग रहा है सरकार ने कई जरूरी बातों की अनदेखी की है.

सरकार की नई नीति से भारत में नए कारोबारी और एंटरप्रेन्योर उभरेंगेः रोहित भाटियानी

वेंचर कैपिटल फर्म सैफ पार्टनर के मैनेजिंग डायरेक्टर आलोक गोयल कहते हैं कि सरकार को कंपनी में कर्मचारियों की साझेदारी (ईएसओपी) पर लगने वाले टैक्स पर ध्यान देना चाहिए था. इसके तहत कंपनी कर्मचारियों को कंपनी के शेयर देती है.

पढ़ेंः महाराष्ट्र में होंगे मुंबई-पुणे जैसे कई दूसरे कारोबारी केंद्र

आलोक कहते हैं, "मौजूदा हालात में अगर किसी कर्मचारी के पास पांच करोड़ रुपये के ईएसओपी है, वो कंपनी के लिस्टेड होने के बाद नौकरी छोड़ देती है और उसने अपने शेयर को बेचा नहीं है तो उसपर 33 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. और उसे ये भी नहीं पता चलेगा कि उसका पैसा कभी वापस आएगा या नहीं."

भारत में फिलहाल कुल 4200 स्टार्ट-अप हैं जिनमें एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है. आईटी जगत की संगठन नासकॉम के अनुमान के मुताबिक साल 2020 तक भारत में 11,500 स्टार्ट-अप हो जाएंगे. जाहिर है नई स्टार्ट-अप नीति उनके लिए एक वरदान है.

First published: 17 January 2016, 19:22 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी