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अब टिकट कैंसिलेशन से भरा रेलवे का खजाना, कमाए 1400 करोड़ रुपये

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 June 2017, 15:27 IST

रेलवे को टिकटों की बिक्री के साथ यात्रियों के टिकट कैंसिलेशन के अनुरोध से बंपर फायदा हो रहा है. यात्रियों के अनुरोध पर उनके आरक्षित टिकट कैंसिल कराने से रेलवे की कमाई में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है. आरक्षित टिकटों के कैंसिल करने से रेलवे का राजस्व वित्तीय वर्ष 2016-2017 में पिछले साल के मुकाबले 25.29 प्रतिशत बढ़कर 14.07 अरब रुपये हो गया है.

मध्य प्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत ये जानकारी निकाली है. चंद्रशेखर ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को बताया कि उन्हें रेल मंत्रालय के रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी मिली है.

उनकी आरटीआई अर्जी पर 13 जून को भेजे जवाब में सीआरआईएस के एक अफसर ने यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) के तहत उपलब्ध जानकारी के हवाले से बताया कि रेलवे ने टिकट रद्द करने के अनुरोध पर यात्रियों से पैसे कमाए हैं. 

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (यूटीएस) के तहत बुक कराए गए यात्री टिकटों को रद्द किये जाने से रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2012 -2013 में 12.98 करोड़ रुपये, 2013-2014 में 15.74 करोड़ रुपये, 2014-2015 में 14.72 करोड़ रुपये, 2015-2016 में 17.23 करोड़ रुपये और 2016-2017 में 17.87 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया.

उन्होंने बताया कि रेलवे ने टिकट रद्द कराये जाने पर तय कटौती के बाद यात्री को रिफंड के नियमों में बदलाव को नवंबर 2015 में हरी झंडी दी थी. टिकट निरस्तीकरण शुल्क को पहले से लगभग दोगुना बढ़ा दिया था. इन संशोधित कायदों को सरकारी जुबान में रेल यात्री (टिकट रद्दकरण और किराए का सरचार्ज) नियम 2015 के रूप में जाना जाता है.

First published: 28 June 2017, 15:27 IST
 
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