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रेलवे में फ्लेक्सी किराया दरें आम आदमी के साथ धोखा है, जानिए कैसे?

नीरज ठाकुर | Updated on: 9 September 2016, 14:39 IST

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे की कुछ विशेष ट्रेनों के लिए विशेष किराया दरों की घोषणा की है. ये दरें नौ सितम्बर से लागू होंगी. लोगों को बुक किए गए सीट नम्बर के आधार पर एक ही टिकट की अलग-अलग कीमतें अदा करनी होंगी. फिलहाल ये दरें राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों पर लागू होंगी.

इस तरह की परिवर्तनशील दरों (सर्ज प्राइसिंग) का चलन विमान सेवा उद्योग में लंबे समय से रहा है. एयरलाइन सेवाएं ऐसी यात्री किराया दर इसलिए रखती हैं ताकि लोग एडवांस बुकिंग करवाएं और वे अपनी यात्रियों की अच्छी संख्या बरकरार रख सकें. टैक्सी कम्पनियां उबर और ओला भी इसी प्रकार अपनी किराया दरें रखती हैं. कई राज्य सरकारों ने इसका कड़ा विरोध किया है.

जब से राजग सरकार सत्ता में आई है, इसने रेलवे को आधुनिक करने का बीड़ा उठाया है और सर्ज प्राइसिंग भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है.

रेल मंत्रालय के अनुसार, ‘हर दस प्रतिशत बर्थ की बिक्री होने के साथ ही मूल किराये में निर्धारित सीमा तक दस प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी.

खबरों के अनुसार रेल किराया प्रति 10 प्रतिशत की बुकिंग पर 10 % वृद्धि के साथ तब तक बढ़ता रहेगा जब तक कि यह लिमिट 50 प्रतिशत तक न पहुंच जाए.

परन्तु इससे पहले कि सरकार यह नई दरें लागू करे, सरकार को कुछ सवालों के जवाब जरूर देने चाहिए

परन्तु इससे पहले कि सरकार यह नई दरें लागू करे, सरकार को कुछ सवालों के जवाब जरूर देने चाहिए:

  • एयरलाइन उद्योग में अगर कोई यात्री तीन माह पहले ही एडवांस बुकिंग करवाता है तो उसे टिकट मिलने की संभावना क्या होती है?
  • क्या एयरलाइन टिकट लोगों को दलालों से ब्लैक में खरीदनी पड़ती है?

जवाब है- नहीं. अब गौर कीजिए भारतीय रेल पर! कोई भी त्यौहारी मौसम हो, आप उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की यात्रा करने का विचार करें और मंत्रालय द्वारा बिक्री के लिए जारी होते ही उस ट्रेन के लिए टिकट बुक करवाना शुरू कीजिए. इस बात की प्रबल संभावना है कि अगर आप पांच मिनट मेें कोई टिक्ट बुक नहीं करवा सके तो आपको टिक्ट मिलेगा ही नहीं.

सर्ज प्राइसिंग की नीति उसी उद्योग में कारगर है, जिनके पास मांग के अनुसार आपूर्ति करने की भी क्षमता हो. लेकिन भारतीय रेल के संदर्भ में देखा जाए तो चार माह पहले की एडवांस बुकिंग पर भी यह उपभेक्ताओं की मांग के अनुरूप टिकट नहीं दे पाएगी.

देखते हैं नौ सितम्बर से क्या होता है? ज्यादा से ज्यादा दलाल टिकटों की एडवांस बुकिंग कर उन्हें बाद में ऊंची दरों पर बेचने के लिए एडवांस में ही खरीद लेंगे.

सरकार को इससे क्या मिलेगा? यह सीधे-सीधे उस जनता का शोषण है जो हवाई यात्रा का टिकट उसकी मूल कीमत (3900 से 4,000 रूपए) पर नहीं खरीद सकती. उसे संभवतः रेल यात्रा के लिए हवाई यात्रा के टिकट की 80 प्रतिशत कीमत चुकानी पड़ेगी.

यह सीधे-सीधे उस जनता का शोषण है जो हवाई यात्रा का टिकट उसकी मूल कीमत (3900 से 4,000 रूपए) पर नहीं खरीद सकती

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आपको राजधानी में दिल्ली से पटना तक की यात्रा करनी है. अब अगर सर्ज प्राइस की नीति लागू होगी तो नियमानुसार कम से कम 40 फीसदी उपभोक्ताओं को टिकट की 50 प्रतिशत अतिरिक्त कीमत अदा करनी होंगी. (प्रारंभिक दस प्रतिशत की बुकिंग के बाद 50 प्रतिशत तक की लिमिट तक सर्ज कीमतें 10 प्रतिशत की दर से बढ़ती जाती हैं).

अतः सर्वाधिक सर्ज कीमत दर अनुसार 40 फीसदी रेल यात्री को पटना जाने के लिए 2430 रूपए देने होंगे. दिल्ली-पटना राजधानी की मौजूदा टिकट की कीमत 1660 रुपए है.

ये कीमतें तब लागू होंगी जब यात्री टिकट बिक्री शुरू होने के पहले पांच मिनट के भीतर टिकट बुक करवा पाए तो ठीक वरना ज्यादातर लोग टिकट एजेंटों पर ही निर्भर हो जाते हैं, जो कम से कम 500 रुपए ज्यादा लेते हैं, उस कीमत से जो उन्होंने स्वयं अदा की है.

इसका मतलब राजधानी से दिल्ली-पटना यात्रा करने वाले 40 प्रतिशत यात्रियों को प्रति टिकट 3,000 रूपए की कीमत चुकानी पड़ेगी (अगर हम चार माह पहले बुक करवाएं)

परन्तु अगर गो एयर या इंडिगो की हवाई यात्रा की टिकट तीन माह एडवांस में बुक की जाए तो भी वह उसी कीमत की मिलेगी. तो फिर वे 40 प्रतिशत उपभोक्ता क्यों 12 घंटे की ट्रेन यात्रा करें जो कि पौने दो घंटे में अपने गंतव्य पर उसी कीमत में पहुंच सकते हैं.

संभवतः इस योजना से हवाई यात्रा की टिकट दरें भी बढ़ जाएं. इसलिए रेलवे के बजाय इसका अप्रत्यक्ष फायदा इवाई यात्रा कम्पनियों को अधिक होगा, क्योंकि शताब्दी, राजधानी और दूरंतो के किराये बढ़ चुके हैं.

परन्तु उन लोगों का क्या, जो दलालों से भी टिकट नहीं ले पाते? वे सभवतः रेल मंत्री सुरेश प्रभु से आग्रह करेंगे कि वे स्वयं अपने लिए रेलवे का एक टिकट ऑनलाइन खरीद कर देखें. शायद इसी से उन्हें उन लाखों यात्रियों की तकलीफ का अंदाजा हो जाए जो प्रतिदिन अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए भारतीय रेल की यात्रा कर रहे हैं.

First published: 9 September 2016, 14:39 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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