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रुपये में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट, आर्थिक मंदी और महंगाई की है आहट!

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 September 2018, 16:10 IST

डॉलर के मुकाबले रुपये में आज इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. आज दोपहर भारतीय मुद्रा रुपया 72.50 के रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच  गया. जबकि घरेलू इकाई में रुपया 85 पैसे गिरकर 72.58 तक आ गया. आज बैंकों और आयातकों द्वारा अमेरिकी मुद्रा की निरंतर खरीदारी के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये का इतना बड़ा अवमूल्यन हुआ है.

रुपए में रिकॉर्ड कमी और विश्व में जारी आर्थिक उठा-पटक के कारण, आज यानि सोमवार को भारतीय शेयर मार्केट भी औंधे मुँह गिर रहा है. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 457 अंक टूटकर 37, 931 तक पहुंच गया जबकि निफ्टी 147 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

वैसे तो रुपये के टूटकर यहां तक पहुंचने में कई कारक जिम्मेदार हैं लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड-वॉर और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है. विश्व भर में अमेरिकी करेंसी डॉलर की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है और डॉलर लगातार मजबूत होता जा रहा है.

आर्थिक विशेषज्ञों ने जताई चिंता

कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट से महंगाई दर भी काफी बढ़ सकती है. अगर ऐसा ही होता रहा तो देश की अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है और विकास पर ब्रेक लग जाएगा. आर्थिक विशेषज्ञों की इस आशंका को सच होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा क्योंकि रुपया न्यूनतम स्तर ने रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है. अगर ऐसे ही गिरावट जारी रहा तो आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है हमारा देश.

ऐसे कमजोर हो रहा है रुपया

आर्थिक जानकर तुर्की में जारी आर्थ‍िक संकट को भी रुपये के कमजोर होने की वजह बता रहें है. गौरतलब है कि भारत एक आयातक देश है, हमारे देश को दूसरे देशों से तेल और अन्य सामान खरीदने के लिए अधिकांशतः यूएस डॉलर में भुगतान करना होता है. ऐसे में हमारे यहां महगाई बढ़ जाएगी, एक ओर जहां तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है तो दूसरी ओर रुपये का अवमूल्यन हो रहा है.

आ सकती है आर्थिक मंदी

सिर्फ भारत ही नहीं दुनियां के कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. अमेरिकी प्रतिबन्ध के कारण ईरान की अर्थव्यस्था में भी उथल-पुथल जारी है. भारत तेल का बड़ा हिस्सा ईरान से आयात करता है. अमेरिका भारत सहित अन्य देशों पर ईरान से तेल नहीं खरीदने का दबाब बना रहा है. अगर ऐसा हुआ तो भारत को अन्य देशों से महंगा तेल आयात करना पड़ेगा और उन्हें डॉलर में ही भुगतान करना होगा जिससे रुपये में और गिरावट आ सकती है.

First published: 10 September 2018, 16:10 IST
 
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