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डूब रही हैं भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां, इस साल बिके 50000 करोड़ के चाइनीज मोबाइल

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 October 2018, 11:42 IST

भारत ने चीनी मोबाइल का दबदबा बढ़ता जा रहा है. सैमसंग, एप्पल, गूगल को पीछे छोड़ अब शाओमी, ओप्पो, वीवो जैसे ब्रैंड्स भारत में पहली पसंद बनते जा रहे हैं. आंकड़ों की माने तो वित्त वर्ष 2018 में भारत में चाइनीज स्मार्टफोन्स की बिक्री 50 हजार करोड़ के पार पहुंच गई. देश का आधे से ज्यादा स्मार्टफोन मार्केट चाइनीज स्मार्टफोन कंपनियों के पास है. देश में शाओमी, ओप्पो, विवो, ऑनर की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है. जबकि लेनोवो, मोटोरोला, वन प्लस भी लोकप्रिय ब्रांड बने हुए हैं.

रिसर्च फर्म, काउंटरप्वॉइंट और कैनालिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 की चौथी तिमाही में शाओमी ने सैमसंग को मात दे दी है. काउंटरप्वाइंट ने पाया कि चौथे क्वॉर्टर में शाओमी ने भारत में जहां 25 फीसदी बाजार पर कब्जा जमाया, वहीं सैमसंग 23 फीसदी पर सिमट गई.

1.5 लाख करोड़ रुपये के भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी प्रभुत्व लगभग 10-11% बढ़ गया है. Xiaomi, ओप्पो, विवो और ऑनर जैसे चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन भारतीय बाजार में छाये हुए हैं. आश्चर्य की बात यह है कि भारतीय उपभोक्ताओं ने शीर्ष चार चीनी ब्रांडों पर अपने खर्च (वर्ष-दर-वर्ष) दोगुना कर दिया है. लेनोवो-मोटोरोला, वनप्लस और Infinix की तरह कुछ अन्य चीनी ब्रांडों के साथ ये चार ब्रांड तेजी से भारत में बढ़ रहे हैं. सबसे प्रभावशाली विकास विवो मोबाइल इंडिया ने किया. इसकी सालाना बिक्री 77.6% बढ़कर 11,179.3 करोड़ रुपये हो गई. इस बीच हुआवेई दूरसंचार भारत का मोबाइल बिजनेस राजस्व 56% बढ़कर 5,601.3 करोड़ रुपये हो गया.

आईसीएस के साझा आंकड़ों के मुताबिक देश में मोबाइल फोन का वार्षिक उत्पादन 2014 में 30 लाख इकाई से बढ़कर 2017 में 1.1 करोड़ इकाई हो गया है. अब भारत, वियतमान को पछाड़कर 2017 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक देश बन गया है. बता दें कि देश में मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ने के साथ इनका आयात भी 2017-18 में घटकर आधे से कम रह गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत फास्ट ट्रैक टास्क फोर्स (FTTF) ने 2019 तक मोबाइल फोन उत्पादन 50 करोड़ इकाई तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 46 अरब डॉलर होगा.

क्या हैं भारतीय कंपनियों के हाल

भारतीय कंपनियां माइक्रोमैक्स, लावा, इंटेक्स और कार्बन एक वक्त भारतीय स्मार्टफोन बाजार की चार बड़ी कंपनियां थी. लेकिन वर्तमान इन कंपनियां की पकड़ बाजार पर कमजोर होती जा रही है. हालांकि बाजार पर इनका प्रभाव अभी समाप्त नहीं हुआ है. ये भारतीय ब्रांड 36 करोड़ स्मार्टफोन वाले स्थानीय बाजार के करीब 20 फीसदी हिस्से पर काबिज हैं.

आंकड़ों की माने तो सितंबर 2017 तक सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी 32 फीसदी थी. जबकि माइक्रमैक्स की बाजार हिस्सेदारी 11 फिसदी थी. माइक्रोमैक्स हर तिमाही 80 लाख स्मार्टफोन की बिक्री करती है लेकिन कुल सक्रिय स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं में उसकी हिस्सेदारी 5 फीसदी पर है.

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First published: 30 October 2018, 11:39 IST
 
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