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IndiGo के मालिकों में झगड़ा, एक ने कहा- इंडिगो में गवर्नेंस पान की दुकान से भी खराब

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 July 2019, 9:58 IST

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है क्योंकि प्रमोटर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार भाटिया और गंगवाल, जिन्होंने कॉरपोरेट गवर्नेंस में खामियों का आरोप लगाया है, कंपनी में 70 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है और इंडिगो की सफलता का श्रेय अक्सर उनके तालमेल को दिया जाता है.

गंगवाल ने कहा है कि इंडिगो में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की हालत पान की दुकान से भी खराब हो गई है. 36.68 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले गंगवाल ने एक असाधारण जनरल (ईजीएम) बैठक आयोजित करने की अनुमति मांगी है. जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने आपत्तिजनक संबंधित पार्टी लेनदेन (आरपीटी) में भाग लिया है और कॉर्पोरेट प्रशासन मानकों का अनुपालन नहीं किया है.

उन्होंने कहा है कि भाटिया के स्वामित्व वाली इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज (IGE), जिसका कंपनी पर अधिक नियंत्रण है, ने इंडिगो के साथ RPTs में प्रवेश करने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है. भाटिया ने इन आरोपों से इनकार किया है, कहा कि कंपनी अधिनियम ने कंपनी के बोर्ड को अपनी कार्यप्रणाली तय करने के लिए अधिकार दिए हैं. सेबी चेयरमैन अजय त्यागी को 23 पन्नों के एक पत्र दिया गया है जिसकी एक कॉपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी गई है.

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First published: 10 July 2019, 9:58 IST
 
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