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यात्रियों से वेब चेक-इन शुल्क लेने का विरोध होने पर IndiGo ने दी ये सफाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 November 2018, 11:32 IST

इंडिगो द्वारा वेब चेक-इन के लिए यात्रियों से चार्ज लेने के फैसले पर जारी एक सरकारी समीक्षा की रिपोर्ट के दौरान एयरलाइन ने एक स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि उसने वेब चेक-इन अभ्यास नहीं बदला है. सरकार ने पहले कहा था कि वह इस बात की समीक्षा कर रही है कि यह मौजूदा नियमों के अनुसार है या नहीं.

मंत्रालय ने कहा कि एयरलाइंस अब सभी सीटों के लिए वेब चेक-इन के लिए चार्ज कर रही हैं. "हम इस फीस की समीक्षा कर रहे हैं यह देखने के लिए कि क्या वे अनबंडेड मूल्य निर्धारण ढांचे के भीतर आते हैं." जवाब में, इंडिगो ने एक बयान में कहा, "इंडिगो ग्राहकों को अनिवार्य रूप से सीटों के लिए भुगतान नहीं करना पड़ेगा. कीमत केवल सीटों के अग्रिम चयन के लिए है. जब ग्राहक हवाई अड्डे पर चेक करता है, तो सीटें मुफ्त में असाइन किया जाना चाहिए."

 

लगातार बढ़ रहा है एयरलाइन का घाटा

हालही में एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार से तेल कंपनियों और हवाई अड्डों से असुरक्षित क्रेडिट प्राप्त करने में मदद का अनुरोध किया था. ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण एयरलाइन्स कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है. दरअसल एयरलाइन्स कंपनियों में लगातार कीमतों की प्रतिस्पर्धा पढ़ती जा रही है. कंपनियां लगातार नए सस्ते ऑफर पेश कर रही हैं लेकिन दूसरी ओर ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. विमानन सचिव राजीव नयन चौबे को भेजे पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में एयरलाइंस को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

इसे एयरलाइनों के सामने आने वाली संकट का नवीनतम संकेत माना जा रहा. इंडिगो, स्पाइसजेट लिमिटेड और गो एयरलाइंस इंडिया लिमिटेड घरेलू बाजार का लगभग 80% हिस्सा रखते हैं. सिडनी स्थित सीएपीए सेंटर फॉर एविएशन के मुताबिक मार्च 2019 को खत्म होने वाले साल में भारतीय एयरलाइन्स का नुकसान 1.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और उन्हें जल्द 3 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ती पूंजी जुटाने की जरूरत है.

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First published: 27 November 2018, 11:31 IST
 
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