Home » बिज़नेस » Industry and Home buyers welcomes Real Estate Bill
 

बिल्डरों पर नकेल, समय पर मिलेगा घर

अभिषेक पराशर | Updated on: 11 March 2016, 14:43 IST
QUICK PILL
  • लंबी जद्दोजहद के बाद रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल संसद ने पास कर दिया है. नए कानून से न केवल बिल्डर्स की मनमानी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी बल्कि घर खरीदने वालों को नियत समय पर घर भी मिलने का रास्ता साफ होगा.
  • कानून में बिल्डरों के साथ सख्ती की गई है. धोखाधड़ी के मामले में बिल्डर को न केवल तीन साल की सजा होगी. बल्कि समय पर फ्लैट नहीं दिए जाने के मामले में उसे ग्राहकों को भारी भरकम जुर्माने का भुगतान करना होगा.
  • नए कानून के मुताबिक घर के खरीदारों की शिकायत को 60 दिनों के भीतर सुनवाई करना और निपटाना होगा. अभी तक शिकायतों को सुनने की ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं थी.

रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल के पास होने के साथ ही इंडस्ट्री की लंबे समय से अटकी मांग पूरी हो गई है. बिल लोकसभा में पारित हो चुका था और गुरुवार को इसे राज्यसभा ने भी पारित कर दिया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी होने के साथ ही अब यह कानून बन जाएगा.

रियल एस्टेट रेगुलेटरी कानून से न केवल घर के खरीदारों को बल्कि रियल एस्टेट इंडस्ट्री को भी फायदा होगा. साथ ही रियल एस्टेट इंडस्ट्री में पारदर्शिता आने की वजह से निवेशकों के लिए भी आसानी होगी और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया न केवल सरल होगी बल्कि इस दौरान की जाने वाली गड़बडियों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा.

लंबे समय से ऐसे कानून की मांग कर रहे इंडस्ट्री ने बिल के पास होने का स्वागत किया है. डेवेलपर्स को उम्मीद है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती आएगी वहीं खरीदारों को समय पर घर का कब्जा मिलेगा. 

क्या है कानून?

  1. कानून के तहत रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा जहां बिल्डर्स के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई होगी.
  2. अथॉरिटी के दायरे में कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों तरह की प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद आएंगे.
  3. प्रोजेक्ट में देरी होने पर अब डिवेलपर्स को हर महीने उतनी ही रकम की ईएमआई का भुगतान करना होगा जिनता खरीदार हर महीने करता रहा है.
  4. डेवेलपर्स एक प्रोजेक्ट के लिए ली गई बुकिंग की रकम का 70 फीसदी हिस्सा उस प्रोजेक्ट को छोड़कर किसी और प्रोजेक्ट में नहीं लगाएंगे.
  5. सुपर बिल्ट एरिया को अब गैर-कानूनी करार दिया जा चुका है. साथ ही कारपेट एरिया को स्पष्ट तरीके से पारिभाषित कर दिया गया है.
  6. 500 वर्गमीटर या उससे अधिक एरिया में बने प्रोजेक्ट या 8 से अधिक अपार्टमेंट्स को अब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के साथ पंजीकृत कराना होगा.

जेएलएल इंडिया के चेयरमैन और कंट्री हेड अनुज पुरी इस कानून के बारे में अपनी राय देते हुए कहते हैं, 'पारदर्शी और जवाबदेही वाली व्यवस्था को सुनिश्चित करने की दिशा में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा फैसला है.'

सरकार को अब इस मामले में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए

पुरी ने कहा कि कानून में मनमाना व्यवहार करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ सख्त सजा और समय पर डिलीवरी नहीं दिए जाने के मामले में जुर्माने का प्रावधान रखकर सरकार ने स्थिति को पारदर्शी बनाने की कोशिश की है जिसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी. 

अब सिंगल विंडो की मांग

पुरी के मुताबिक सरकार को अब इस मामले में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'अगर सरकार सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम नहीं शुरू करती है तो इस वजह से होने वाली देरी के कारण वैसे बिल्डर्स को जुर्माना भरना होगा जिसकी मंशा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की थी.' 

देश के जीडीपी में रियल एस्टेट इंडस्ट्री कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है जहां भारी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है

पर्यावरणीय मंजूरी समेत अन्य संबंधित विभागों से परियोजनाओं के लिए अलग-अलग मंजूरी लेनी पड़ती है और इस वजह से प्रोजेक्ट में देरी होती है. 

भरना होगा जुर्माना

देश के जीडीपी में रियल एस्टेट इंडस्ट्री कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है जहां भारी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है. देश के जीडीपी में रियल एस्टेट की करीब 9 फीसदी हिस्सेदारी है. 

हालांकि इतना बड़ा दायरा होने के बावजूद रियल एस्टेट के नियमन की कोई मजबूत व्यवस्था अभी तक विकसित नहीं हो पाई थी. इससे न केवल ग्राहकों को बिल्डर्स की मनमानी सहने के लिए मजबूर होना पड़ता था बल्कि डेवलपर्स को भी नियामकीय स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से प्रोजेक्ट में देरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता था.

प्रोजेक्ट में देरी होने से उसकी लागत में बढ़ोत्तरी होती और इसका आखिर में खामियाजा घर के खरीदारों को उठाना पड़ता था. 

बिल पास होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, 'रियल एस्टेट में नियमन और पारदर्शिता के अभाव की वजह से परियोजनाओं की लागत और समय में बढ़ोतरी होती थी जिससे उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ता था.' 

नए कानून के तहत खरीदार के साथ धोखाधड़ी के मामले में बिल्डर्स को तीन साल जेल तक की सजा हो सकती है

देश में हर साल करीब 10 लाख लोग मकान खरीदते हैं और रियल एस्टेट इंडस्ट्री में करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश होता है.

प्राइड ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद जैन ने कहा, 'लंबे समय से पाइपलाइन में यह बिल अटका हुआ था और अब यह कानून की शक्ल ले चुका है. इससे भारत के रियल्टी बाजार में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे. इससे ग्राहकों को प्रॉपर्टी में निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा.'

बिल्डर्स की जवाबदेही

समय पर मकान का कब्जा नहीं मिलना घर के खरीदारों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. कानून की मदद से इस समस्या को दो तरीकों से सुलझाने की कोशिश की गई है.

पहला अगर किसी बिल्डर ने खरीदार के साथ धोखाधड़ी की तो उसे तीन साल जेल तक की सजा हो सकती है. इतना ही नहीं समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देने पर कंपनी को ग्राहक को भारी-भरकम ब्याज का भुगतान करना होगा.

दूसरे प्रावधान की मदद से सरकार ने परियोजनाओं को समय पर पूरा किए जाने की स्थिति सुनिश्चित करने की कोशिश की है. नए कानून के मुताबिक कंपनियों को अब खरीदारों से मिली राशि का 70 फीसदी हिस्सा निर्माण के मकसद से एक अलग खाते में रखना होगा.

और पढ़ें: घर खरीदने पर मिलेगी 50,000 रुपये की छूट

कंपनियां अभी तक उपभोक्ताओं से बुकिंग की रकम लेकर एक साथ कई प्रोजेक्ट में काम शुरू कर देती थी और इस वजह से उनकी कोई भी परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाती थी. 

नए कानून के बाद जिस परियोजना के लिए बुकिंग होगी उसका 70 फीसदी हिस्सा उसी प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए खाते में रखना होगा. सरकार ने इस प्रावधान की मदद से प्रोेजेक्ट की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने की कोशिश की है.

शिकायत का समाधान

कानून के बाद रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन होगा जो ग्राहकों की शिकायतों को सुनेगा और उन्हें तय समय के भीतर सुलझाएगा. 

प्राधिकरण को 60 दिनों के भीतर शिकायतों का निपटारा करना होगा. अभी तक इस मामले में 90 दिनों की अवधि तय थी.

दिसंबर 2015 में राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी ने इस बिल में कई सारे संशोधन का प्रस्ताव रखा जिसे सरकार ने मान लिया था

डिवेलपर्स को परियोजनाओं का पंजीकरण कराए जाने के बाद ही उसका विज्ञापन देने की अनुमति होगी. इसमें उन्हें प्रोजेक्ट विशेष से जुड़ी सभी जानकारियां देनी होंगी. 

दिसंबर 2015 में राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी ने इस बिल में कई सारे संशोधन का प्रस्ताव रखा था जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया था. अब राज्यसभा में पास होने के बाद देश में रियल एस्टेट के रेगुलेटर को बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है.

भारत का रियल एस्टेट बाजार बेहद बड़ा होने के बावजूद अभी तक असंगठित और अनियंत्रित था. अब नियामकीय व्यवस्था की वजह से न केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों के भरोसे को मजबूती मिलेगी. 

सबसे अहम यह कि अब घर के खरीदारों को ठगे जाने का एहसास नहीं होगा. रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल ने घर खरीदने वाले की इच्छा रखने वाले को भरोसे के साथ बाजार में आने का मौका दिया है. 

और पढ़ें: सूट-बूट का नहीं, खेत खलिहान का बजट

और पढ़ें: स्किल इंडिया को बड़ा आवंटन लेकिन चुनौतियां उससे भी बड़ी

First published: 11 March 2016, 14:43 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी