Home » बिज़नेस » Irony of Cashless India: No fees on cards for buying Alcohol, but paying online for LPG levies transaction charges, PM Modi, Petroleum
 

वाह सरकार! डिजिटल पेमेंट से दारू पर नहीं लेकिन एलपीजी सिलिंडर पर देना पड़ रहा शुल्क

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 11 January 2018, 16:32 IST

केंद्र की मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद डिजिटल इंडिया, कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए देशवासियों को जमकर प्रोत्साहित किया. लेकिन विडंबना है कि केंद्र सरकार की कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल पेमेंट जैसी पहल को 'सरकार के शेर' ही ठेंगा दिखा रहे हैं.

आलम यह है कि आप क्रेडिट या डेबिट कार्ड या ई-वॉलेट जैसे डिजिटल पेमेंट के जरिये बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दारू खरीद सकते हैं, लेकिन घरेलू जरूरत के लिए इस्तेमाल में आने वाला एलपीजी सिलिंडर खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट करते वक्त आपको लेनदेन शुल्क चुकाना पड़ता है.

दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की मंशा है कि देशवासी कैशलेस इकोनॉमी की तरफ राष्ट्र को ले जाने में योगदान दें. इसके अंतर्गत ही कुछ अन्य वजहों के साथ 8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत उन्होंने उस वक्त चलन में मौजूद 500 और 1000 के करेंसी नोटों को बंद कर दिया था.

नोटबंदी के बाद से देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जमकर प्रयास किए गए और इसी दौरान Paytm ने खुद को बहुत बड़ा ब्रांड बना लिया. लोगों ने तमाम ऑनलाइन-ऑफलाइन भुगतान के लिए क्रेडिट-डेबिट कार्ड के इस्तेमाल के साथ ही ई-वॉलेट जैसे डिजिटल पेमेंट माध्यम भी जमकर अपनाए.

इसमें कोई दो राय नहीं कि नोटबंदी के बाद से प्लास्टिक मनी, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, ई-वॉलेट्स में ईजाफा हुआ है. लोग जमकर नगदी की जगह इन माध्यमों से भुगतान कर रहे हैं.

लेकिन सरकार को चाहिए कि वो डिजिटल पेमेंट के लिए निजी कंपनियों से सीख ले और सार्वजनिक क्षेत्र व सरकारी कंपनियों को भी इस तरह के बिना शुल्क वाले ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कहे.

सरकारी तंत्र की क्या कमियां होती हैं, इसकी एक बानगी ही हम आपको दिखा देते हैं. आप किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी कीजिए, रिटेल स्टोर्स पर क्रेडिट कार्ड से दवा-दारू-कपड़े-जेवर-जूते-मोबाइल आदि कुछ भी खरीदिए और फिर अपने क्रेडिट-डेबिट कार्ड या फिर ई-वॉलेट से पेमेंट कीजिए. आपको कोई भी अतिरिक्त शुल्क (चार्ज या फीस) नहीं चुकानी होगा और जितना बिल बना है, केवल उतने का ही भुगतान करना होगा.

लेकिन घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की रिफिल बुकिंग के दौरान ऑनलाइन पेमेंट करने पर सरकार आपसे ट्रांजैक्शन चार्ज (लेनदेन शुल्क) वसूलती है. यहां पर भी हंसी वाली बात यह है कि पहले तो गैस कंपनी आपको डिजिटल पेमेंट करने पर 5 रुपये की तुरंत छूट देने की बात कहती है, लेकिन जैसे ही आप भुगतान करने के लिए आखिरी पेज पर पहुंचते हैं, वहां पर आपको ट्रांजैक्शन चार्ज जोड़कर कुछ और ही अमाउंट बता दिया जाता है.

अगर बात करें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की तो फिलहाल यह एक सब्सिडी वाला एलपीजी सिलिंडर रिफिल 736.50 रुपये में बेच रही है. अगर आप इसकी ऑनलाइन बुकिंग करा लेते हैं, तो घर पर इसकी डिलीवरी के दौरान आपको केवल 736.50 रुपये का ही भुगतान करना होता है.

एचपी गैस का पेमेंट पेज, जिसमें साफ लिखा है 7 रुपये का ट्रांजैक्शन चार्ज.

लेकिन अगर आप ऑनलाइन पेमेंट करते हैं तो पहले तो एचपीसीएल आपको 5 रुपये की छूट देती है और एक सिलिंडर की प्रभावी कीमत 731.50 रुपये हो जाती है. जब आप इसे देख लेते हैं और नियम व शर्तें मानकर ऑनलाइन भुगतान स्वीकृत कर लेते हैं, तो आपको 7 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं. कंपनी आपसे यह रकम ट्रांजैक्शन चार्जेज के रूप में लेती है, क्योंकि आपने भुगतान के लिए ऑनलाइन या डिजिटल पेमेंट का तरीका चुना.

अब सोचिए कि ऑनलाइन पेमेंट करने से आपको फायदा हुआ या सरकार को?

यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एचपीसीएल, बीपीसीएल, आईओसीएल यानी हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं. 

First published: 11 January 2018, 16:23 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

पिछली कहानी
अगली कहानी