Home » बिज़नेस » Is IMF afraid of questioning India's GDP numbers?
 

भारत के जीडीपी आंकड़ों पर सवाल करने से क्यों हिचक रहा है आईएमएफ?

नीरज ठाकुर | Updated on: 17 March 2016, 21:53 IST
QUICK PILL
  • चीन की अर्थव्यवस्था की डगमगाती हालत के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. 2015-16 में भारत का जीडीपी 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि 206-17 में इसकी विकास दर 7-7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है.
  • वहीं दूसरी तरफ फरवरी महीने में भी भारत के निर्यात में कमी आई. निर्यात में लगातार 15वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. औद्योगिक उत्पादन में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई. ऐसे में भारत की ग्रोथ स्टोरी के दावे को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

आज से पहले कभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था ग्लोबल इनवेस्टर्स के लिए इतनी अहम नहीं रही. चीन की अर्थव्यवस्था की खराब होती हालत के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. 

2015-16 में भारत का जीडीपी 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि 2016-17 में इसकी विकास दर 7-7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है.

लेकिन इन आंकड़ों से दूसरी ही कहानी सामने आती है.

फरवरी महीने में भी भारत के निर्यात में गिरावट आई. निर्यात में लगातार 15वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. वहीं औद्योगिक उत्पादन में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई. जनवरी में आईआईपी की दर 1.5 फीसदी रही थी.

फरवरी महीने में भी भारत के निर्यात में गिरावट आई. निर्यात में लगातार 15वें महीने गिरावट दर्ज की गई है

दोनों आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के लिए मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 7.6 फीसदी जीडीपी को उचित ठहराना मुश्किल होगा. पहले तीन तिमाहीके आंकड़ों के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 7.9 फीसदी रहनी चाहिए.

कई अर्थशास्त्रियों ने पिछले दो सालों के दौरान सीएसओ ने भारत के जीडीपी आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं. लेकिन भारत सरकार को इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से समर्थन मिला है जिसने भारत के आंकड़ों का समर्थन किया है.

और पढ़ें: क्या भारत विजय माल्या को ला पाएगा?

हाल ही में भारत के दौरे पर आई आईएमएफ चीफ क्रिस्टीन लेगार्ड ने भारत के आंकड़ों पर विश्वास जताया और कहा कि भारत दुनिया में सबसे चमकता हुआ सितारा है. 

चीन की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के बाद भारत भले ही दुनिया की नजर में हो लेकिन वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों की तरफ से बार-बार सवाल उठाए जाने के बाद आईएमएफ भारत के आंकड़ों पर भरोसा क्यों कर रहा है?

क्योंकि आईएमएफ के अनुमान के बाद भारत में कई बड़े निवेशक अपने निवेश का फैसला लेंगे. तो क्या आईएमएफ को भारत के आंकड़ों को लेकर ज्यादा सतर्क नहीं होना चाहिए?

आईएमएफ के अनुमान के आधार पर ही भारत में दुनिा भर के कई बड़े निवेशक निवेश का फैसला लेंगे

नेशनल पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के एक प्रोफेसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, 'आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों को भारत के बारे में बहुत नहीं पता है. और आईएमएफ सार्वजनिक तौर पर भारत के आंकड़ों पर सवाल नहीं उठा सकता.'

मिंट में लिखे एक आर्टिकल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट रिसर्च के असिस्टेंट प्रोफेसर राजेश्वरी सेनगुप्ता के मुताबिक भारत की वास्तविक ग्रोथ सीएओ के 7 फीसदी अनुमान के मुकाबले 5 फीसदी रहेगी.

लेकिन अगर ग्रोथ के आंकड़े गुमराह करने वाले हैं और आईएमएफ भारतीय अर्थव्यवस्था की बारीकियों को समझे बिना सीएसओ के डेटा को गंभीरता से ले रहा है तो ऐसे में उन निवेशकों का क्या होगा जो भारत में निवेश करना चाहते हैं?

और पढ़ें: क्या माल्या उतने 'दिवालिया' हैं कि बैंकों का कर्ज न चुका सकें?

क्या आईएमएफ भारत के डेटा पर भरोसा कर वैश्विक निवेशकों को गुमराह कर रही है?

इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट रिसर्च के प्रोफेसर आर नागराज बताते हैं, 'हां उन्हें गुमराह किया जा सकता है. लेकिन मुझे लगता है कि वह निवेश करने से पहले ब्रोकरेज हाउस और निवेश सलाहकारों से बात करेंगे जहां उन्हें सही तस्वीर मिलेगी.'

नागराज के दावों में सच्चाई नजर आती है क्योंकि निवेशकों ने भारत सरकार के साथ साथ आईएमएफ के दावों को भी खारिज कर दिया है.

2015 में देश के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को 3.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश मिला जबकि 2014 में इस क्षेत्र में 4.05 लाख करोड़ रुपये मिले. अगर भारत 7 फीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है तो फिर निवेशक निवेश करने से क्यों कतरा रहे हैं?

तो क्या भारत आंकड़ों को लेकर भरोसा जगा सकता है?

ऐसे में सरकार को एक स्वतंत्र कमेटी बनाकर भारत के ग्रोथ के आंकड़ों की समीक्षा करानी चाहिए. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के अजय छिब्बर ने कहा, 'जीडीपी के आंकड़ों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र पैनल का गठन किया जाना चाहिए.' लेकिन क्या एनडीए सरकार को विश्वसनीयता की फिक्र है.यह बड़ा सवाल है.

और पढ़ें: आखिरकार सीबीआई और ईडी ने कसा माल्या पर शिकंजा
First published: 17 March 2016, 21:53 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी