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पीएम मोदी बजट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत लेकर आ रहे हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 January 2018, 11:52 IST

तेल में लगातार बढती कीमतों के मद्देनजर आगामी बजट में सरकार लोगों को कुछ राहत दे सकती है. मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को समाचार एजेंसी रायटर को बताया कि भारत का तेल मंत्रालय आगामी 2018/19 बजट में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर सकता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो इस साल के अंत में कई प्रमुख राज्यों में चुनाव के लिए प्रचार करते नजर आयेंगे. ऐसे में 2019 के आरम्भ में लोकसभा चुनाव में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ोतरी के दबाव का सामना करना पड़ा है.

 

दक्षिण एशियाई राष्ट्रों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की सबसे अधिक खुदरा कीमतें हैं क्योंकि यहां 40-50 प्रतिशत टैक्स लगता है. वर्तमान में पेट्रोल कि कीमत दिल्ली में 72.23 रुपये (1.13 डॉलर) है जबकि डीजल 63.01 रुपये में बिक रहा है. 

एक वरिष्ठ पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "हम केवल सुझाव दे सकते हैं. यह निर्णय वित्त मंत्रालय पर निर्भर है." बजट में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती, 1 फरवरी को जारी होने की वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सरकार वस्तुओं और सेवा करों के कार्यान्वयन के कारण कर राजस्व में कमी के बीच राजकोषीय अंतर को दूर करने के लिए संघर्ष कर रही है. 

2016/17 में पेट्रोलियम क्षेत्र से 5.2 ट्रिलियन रुपये (81 अरब डॉलर) का राजस्व योगदान सरकार को मिला था. भारत ने नवम्बर 2014 और जनवरी 2016 के बीच नौ बार तेल पर एक्साइज ड्यूटी बढाई. क्योंकि वैश्विक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी. 

सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने जीएसटी में पेट्रोल, डीजल, जेट ईंधन और प्राकृतिक गैस को शामिल करने की मांग की है ताकि कंपनियों को रिफाइंड ईंधन उत्पादन करने के लिए उपकरणों की खरीद पर कर के खिलाफ टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सके.

तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने पर उत्पादों के अलावा रीटेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी, भले ही सरकार इस पर 28 प्रतिशत की दरों को लागू करे.

मंत्रालय ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए देश के पूर्वोत्तर में ईंधन और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए संघीय सहायता की मांग की है. भारत में आर्थिक विकास काफी हद तक पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में केंद्रित है, जिनके पास बेहतर बुनियादी ढांचे और अधिक सुलभ ऊर्जा आपूर्ति है.

सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने पूर्वोत्तर में 650 किलोमीटर (404 मील) ईंधन की पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकारी सहायता की मांग की है, जिसकी कीमत 13 अरब रुपए है, क्योंकि इस क्षेत्र में ईंधन की कम मांग के कारण परियोजना आर्थिक रूप से अशक्त है.

First published: 23 January 2018, 11:52 IST
 
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