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स्विस बैंक नहीं, ये देश बन रहा है अब भारतीयों के कालेधन का अड्डा ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2019, 7:17 IST

स्विस बैंकों में भारतीय खाताधारकों की जानकारी देने के लिए स्विटजरलैंड के साथ हुए समझौते के बाद पिछले एक साल में दक्षिण कोरिया में भारतीय धन का भारी पलायन हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार बैंक ऑफ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) के आंकड़ों बताते हैं कि 2018 के दौरान दक्षिण कोरियाई बैंकों में गैर-बैंक (नॉन बैंक डिपॉजिट) जमा में 900 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इस नॉन बैंक डिपाजिट में कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत जमा शामिल हैं. इसमें इंटर बैंक ट्रांजेक्शन शामिल नहीं है. ये वही जमा हैं जिसका जिक्र पूर्व वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 2018 में स्विस बैंकों में भारतीयों की बढ़ती जमाराशि  पर नरेंद्र मोदी सरकार के बचाव में किया था.

2018 के अंत तक 904 मिलियन डॉलर हुए जमा  

बीआईएस के आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण कोरिया में भारतीय निवासियों के गैर-बैंक लोन और जमा 2018 के अंत में 904 मिलियन डॉलर थे. जबकि उसके पिछले वर्ष भारतीयों ने दक्षिण कोरियाई बैंकों में सिर्फ 1 मिलियन डॉलर रखे थे. 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारतीयों ने मुश्किल से उस देश में 4 मिलियन डॉलर रखे. इसकी दुनियाभर से तुलना की जाए तो भारतीयों द्वारा इस तरह की जमा राशि 2018 में 9.5 बिलियन डॉलर थी, जो एक साल पहले की तुलना में 1 बिलियन डोलर अधिक थी.

स्विस बैंकों से निकाला जा रहा है पैसा 

दुनिया भर से दक्षिण कोरिया में इस तरह की जमा राशि 2018 में लगभग दोगुनी हो गई जो 19 बिलियन से एक साल पहले 37 बिलियन डॉलर तक थी. यहां तक कि जब दक्षिण कोरिया ने भारतीयों द्वारा गैर-बैंक जमा में भारी वृद्धि देखी गई तब स्विस बैंक खातों से धन निकला गया और अन्य टैक्स हैवेन देशों में भेजा गया. बीआईएस के अनुसार, भारतीयों ने 2018 में स्विस बैंकों में गैर-बैंक जमा में लगभग 85 मिलियन डॉलर रखे, जबकि 2014 में 347 मिलियन डॉलर थे. स्विस बैंक की जमा राशि हर साल पहली मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान गिर गई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों का जमा कर हो रहा है. इसी तरह हांगकांग में भारतीयों की जमा राशि 2015 में पांच साल के उच्च स्तर 1.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई लेकिन 2018 में यह गिरकर लगभग 600 मिलियन डॉलर हो गई. आइल ऑफ मैन और जर्सी जैसे अन्य टैक्स हैवन में भारतीयों द्वारा इस तरह के जमा में उल्लेखनीय गिरावट आई. यूनाइटेड किंगडम (यूके) में भारतीयों द्वारा गैर-बैंक जमा में मंदी के बाद की प्रवृत्ति बढ़ रही है, इस बीच ऊपर की ओर प्रवृत्ति जारी है. 2018 में यह $ 2.7 बिलियन के पांच साल के उच्च स्तर को छू गया, जो सभी देशों में सबसे अधिक था.

कोरिया में क्रिप्टो करेंसी का क्रेज

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कोरिया में जमा में आश्चर्यजनक वृद्धि बताती है कि यह उस देश में 2017 के क्रिप्टोक्यूरेंसी बूम के साथ मेल खाती है. कुछ समय पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि दक्षिण कोरिया में क्रिप्टोकरेंसी का क्रेज अपने चरम पर है. जिसमें बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले देश के एक तिहाई कर्मचारी थे.

दक्षिण कोरियाई बैंक ग्राहकों को वर्चुअल-मुद्रा अकाउंट भी दे रहे थे. हालांकि, 2018 तक दक्षिण कोरिया के वित्तीय सेवा आयोग (एफएससी) ने उन बैंकों के खिलाफ जांच शुरू की, जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को संभालने के लिए वर्चुअल-करेंसी खाते प्रदान किए थे.

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हैरानी की बात है कि दक्षिण कोरिया में क्रिप्टो करेंसी के बंद होने के बावजूद भारतीयों ने वहां अधिक धन जमा करना जारी रखा. जनवरी से अप्रैल 2018 तक दक्षिण कोरियाई बैंकों में भारतीयों की जमा राशि 1 मिलियन डॉलर से बढ़कर 600 मिलियन डॉलर हो गई. अप्रैल से जुलाई तक यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर हो गई.

सितंबर से दिसंबर तक 100 मिलियन डॉलर पहुंची. 8 जनवरी 2018 को एक रॉयटर्स की रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया के FSC के अध्यक्ष, चोई जोंग-के के हवाले से कहा गया था: "वर्चुअल करेंसी वर्तमान में भुगतान के साधन के रूप में कार्य करने में असमर्थ है और उसका उपयोग गलत उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है.

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First published: 12 July 2019, 15:30 IST
 
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