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क्या खतरे में है Snapdeal का अस्तित्व?

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 22 March 2017, 17:55 IST

भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली कंपनी Snapdeal का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है. खबर है कि Snapdeal बिकने वाली है और इसके लिए वो अपने प्रतिस्पर्धी Flipkart से बातचीत भी कर रही है.

ऑनलाइन न्यूज साइट मिंट द्वारा इस संबंध में एक खबर की गई है जिसमें सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि Snapdeal के सबसे बड़े निवेशक जापान के सॉफ्टबैंक की अगुवाई में इसकी बिक्री की बातचीत चल रही है.

खबर में यह भी बताया गया है कि अगर सौदा हो जाता है तो Snapdeal की कुल कीमत 1.5 से 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 98.24 से 117.88 अरब रुपये) आंकी जा सकती है. हालांकि यह कुल रकम इसकी पैरेंट कंपनी जैस्पर इंफोटेक द्वारा जुटाई गई 2 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 131 अरब रुपये) से काफी कम है.

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 रिपोर्ट की मानें तो सौदा पूरा होने तक सॉफ्टबैंक 5 करोड़ डॉलर (करीब 327 करोड़ रुपये) का और निवेश करेगा. हालांकि Snapdeal के प्रवक्ता ने Paytm या Flipkart के हाथों बिकने की खबरों को अफवाह करार देते हुए इनका खंडन किया है. मिंट से Snapdeal के प्रवक्ता ने कहा, "आपकी सूचना गलत और निराधार है. हम मुनाफे की तरफ जरूरी विकास कर रहे हैं और हमारे सभी प्रयास इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं."

वहीं, इससे पहले बीते माह इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि Snapdeal ने ई-कॉमर्स पोर्टल Paytm के साथ विलय की संभावनाओं पर बातचीत की है. गौरतलब है कि चीन की दिग्गज कंपनी Alibaba ने इन दोनों कंपनियों में निवेश किया है. Alibaba ने हाल ही में 177 मिलियन डॉलर (करीब 1158 करोड़ रुपये) का निवेश कर Paytm में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ा लिया था.

गौरतलब है कि Flipkart और Amazon India के बाद Snapdeal देश का तीसरा सबसे बड़ा ई-मार्केटप्लेस है. लेकिन पिछले कुछ वक्त से बाजार की उथल-पुथल, मुनाफे में गिरावट, नुकसान में बढ़ोतरी और बाजार में हिस्सेदारी गिरने के कारण कई कर्मचारियों ने भी कंपनी छोड़ी थी.

इससे पहले पिछले साल जारी एक रिपोर्ट के अनुसार जैस्पर इंफोटेक द्वारा संचालित ई-कॉमर्स बाजार स्नैपडील को भी मार्च 2015 तक समाप्त वित्तीय वर्ष में 1,328 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा था.

बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अमेजॉन इंडिया, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसे तीनों दिग्गजों के बीच जमकर प्रतिस्पर्धा चल रही है. जिसके चलते इन्हें कर्मचारियों, विपणन और प्रचार पर भारी खर्च करना पड़ रहा है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक कंपनियों में स्पर्धा के कारण भारत में विशाल बाजार के बावजूद उन्हें नुकसान हुआ

हालांकि, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को इससे प्रतिस्पर्धी गतिशीलता का सामना करना पड़ा जिसने कंपनियों को भारत में विशाल बाजार के अवसरों के बावजूद नुकसान से रूबरू करवाया.

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क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक, "अधिकांश ई-कॉमर्स सेगमेंट्स में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा है और मौजूदा रणनीति के मुताबिक उन्हें अपने कारोबार को बनाए रखने के लिए और प्रतिस्पर्धी कंपनियों से निपटने के लिए भारी निवेश करना पड़ेगा, जिसकी कीमत उन्हें नुकसान उठाकर चुकानी होगी."

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 तक भारत का ई-कॉमर्स बाजार मौजूदा 26 अरब डॉलर से बढ़कर 103 अरब डॉलर होने की उम्मीद है. भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या चार गुना बढ़कर 40 करोड़ हो चुकी है. इनमें से 30 करोड़ यूजर्स महीने में कम से कम एक बार इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और चार करोड़ लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं.

First published: 22 March 2017, 17:55 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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