Home » बिज़नेस » IT companies file lawsuit against U.S. immigration agency over shorter duration of H-1B visas
 

एच-1बी वीजा: 1000 आईटी कंपनियों ने किया अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी के खिलाफ मुकदमा

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 October 2018, 12:08 IST

भारतीय-अमेरिकियों द्वारा संचालित 1000 से अधिक छोटी आईटी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकीलों के समूह ने अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. ये मुकदमा एच -1 बी वीजा की अवधि तीन साल से कम करने के विरोध में किया गया है. गौरतलब है कि एच 1 बी वीज़ा एक गैर-अप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को रोजगार देने की अनुमति देता है.

एच 1 बी वीज़ा उन लोगों को दिया जाता है जिन्हे तकनीकी विशेषज्ञता हासिल होती है. प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को अपने यहां काम पर रखती हैं. इस वीजा को आम तौर पर नियोक्ता को एक विदेशी कर्मचारी को किराए पर लेने के लिए तीन से छह साल के लिए जारी किया जाता है.

टेक्सास में डलास स्थित समूह ने अपने 43 पेज का मुक़दमा पिछले हफ्ते दायर किया था और इसमें कहा था कि अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) ने हाल ही में तीन साल की अवधि के लिए एच -1 बी याचिकाओं को मंजूरी देने का अभ्यास शुरू कर दिया है.

ये याचिकाएं अक्सर एक ही समय में केवल महीनों या दिनों के लिए मान्य होती हैं, और कुछ मामलों को स्वीकृति मिलने के समय समाप्त हो जाता है. इसमें कहा गया है कि एजेंसी को मौजूदा नियमों की गलत व्याख्या करने और अनुमोदन अवधि को कम करने का कोई अधिकार नहीं है. मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि यूएससीआईएस द्वारा दी जाने वाली यात्रा कार्यक्रम भी गैरकानूनी है.

यूएससीआईएस के खिलाफ आईटीएसएआर द्वारा दायर दूसरा मुकदमा है. जुलाई 2018 में दायर किए गए पहले मुकदमे में आईटीएसएआर ने यूएससीआईएस को अपनी वेबसाइट से भाषा को हटाने के लिए तीसरे भाग के ग्राहक स्थानों पर काम कर रहे एफ -1 एसटीईएम ओपीटी छात्रों को प्रतिबंधित करने की मांग की थी.

ये भी पढ़ें : ट्रम्प के टैक्स सुधारों की वजह से ग्लोबल एफडीआई में आयी इतनी बड़ी गिरावट

First published: 16 October 2018, 12:02 IST
 
अगली कहानी