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200 करोड़ की माफी, लगता है अच्छे दिन तो गौतम अडानी के आए हैं

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

खबरों के अनुसार भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने अडानी पोर्टस एंड एसईजेड लिमिटेड पर लगाए गए 200 करोड़ के हर्जाने को वापस लेने का निर्णय लिया है. 

मंत्रालय ने ये हर्जाना गौतमी अडानी की कंपनी द्वारा गुजरात के मुंद्रा स्थित प्रोजेक्ट से पर्यावरण को पहुंचे नुकसान के कारण लगाया था.

अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड की शनिवार की खबर के मुताबिक मंत्रालय ने अडानी के वाटरफ्रंट प्रोजेक्ट को दिए ग्रीन क्लियरेंस का भी बढ़ा दिया है.

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साल 2013 में अदालत द्वारा नियुक्त एक समिति ने अडानी की कंपनी पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए पूरे प्रोजेक्ट की लागत का 1% (200 करोड़ रुपये) हर्जाना तय किया था. 

उसके बाद तत्कालीन कांग्रेस गठबंधन सरकार ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस भेजा. कंपनी के जवाब से असंतुष्ट होने के कारण तत्कालीन सरकार ने हर्जाने को बरकरार रखा.

कंपनी पर लगाया गया हर्जाना जनवरी से मार्च 2016 के बीच कंपनी द्वारा कमाए गए मुनाफे 566 करोड़ रुपये से काफी कम है. ऐसे में बीजेपी गठबंधन सरकार द्वारा हर्जाने की राशि माफ करना उसके दोहरे रवैये को उजागर करता है.

मंत्रालय की दोहरी जबान

करीब एक महीने पहले पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था कि सरकार पर्यावरण कानून का उल्लंघन करने वालों से कड़ाई से निपटेगी.

सरकार ने दोषियों पर लगाए जाने वाले जुर्माने की रकम बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने और जेल की सजा का भी प्रावधान कर दिया. जावड़ेकर ने नए बदलावों को बड़ा कदम बताते हुए पुराने कानून को कमजोर बताया था.

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उस समय जावड़ेकर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा था, "असली समस्या कानून पर अमल की है. हमारे देश में कई कानून और सैकड़ों नियम हैं लेकिन उनपर बहुत कम अमल होता है. हमें कानून को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया को आसान बनाना होगा और उसका उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी. हमने नए कानून का मसौदा तैयार किया है जिससे उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा."

अभी तक मंत्रालय की तरफ से इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है फिर भी ये समझना मुश्किल नहीं है कि उसकी कथनी और करनी में फर्क है.

पीएम के करीबी

अडानी पोर्ट्स के मालिक गौतम अडानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है. ऐसे में संभव है कि 200 करोड़ रुपये के हर्जाने को माफ करने का फैसला ऊपरी स्तर पर हुआ हो.

बीजेपी गठबंधन सरकार का करीब आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है लेकिन जमीनी स्तर पर शायद ही कोई बदलाव दिखा हो. 

पीएम मोदी ने चुनाव से पहले आम जनता से 'अच्छे दिन' आने का वादा किया था लेकिन लगता है कि अभी 'अच्छे दिन' केवल अमीर कारोबारियों के लिए आए हैं. 

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First published: 3 July 2016, 8:51 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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