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आखिरी मिनट में ऐसे जमा करें अपना इनकम टैक्स रिटर्न, वरना लगेगा इतना जुर्माना

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 August 2018, 15:23 IST

आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने के लिए अब कुछ ही दिन बचे हैं. अगर आप अपना आईटीआर जमा करते हैं तो आपको 31 अगस्त से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न जमा करना होगा, अन्यथा आपको जुर्माना अदा करना होगा और इस जुर्माने की अधिकतम सीमा 10,000 रुपये हो सकती है.

अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा तो आपको 10 हजार रुपए तक की पेनल्टी देनी पड़ सकती है। अगर किसी की आय 5 लाख रुपए तो उस पर 1 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई जाएगी। अगर कोई 1 सितंबर से 31 दिसंबर के बीच रिटर्न भरता है तो उस पर 5 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई जाएगी। 31 दिसंबर 2018 के बाद रिटर्न भरने पर 10 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई जाएगी। अगर टैक्स की देनदारी बनती है तो उस पर ब्याज भी वसूला जाएगी.

आईटीआर फाइलिंग शुरू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आपके दस्तावेज हैं. दस्तावेज इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप आपके इनकम टैक्स की प्रवृती क्या है. इस वर्ष भी एक पृष्ठ आईटीआर फॉर्म, यानी आईटीआर -1 या सहज, आपको घर की संपत्ति से वेतन और आय का विस्तृत ब्रेक-अप प्रदान करने की आवश्यकता है. आईटीआर -1 दर्ज करने के लिए आपको फॉर्म 16, सैलरी स्लिप, होम लोन पर ब्याज का प्रमाण पत्र आदि की आवश्यकता है.

अगर आपने नौकरी छोड़ दी, फॉर्म 16 की है जरूरत

अगर आपने पिछले वित्त वर्ष में नौकरी छोड़ दी है तो इस साल आपको दो फॉर्म-16s की आवश्यकता होगी. जिसमे एक करंट एम्प्लायर का और एक फॉर्म पिछले एम्प्लायर का होगा. हम में से कई को दो फॉर्म 16 दिखाने में मुश्किल हो सकती है क्योंकि यह पता लगाने में वह भ्रमित हो सकता है कि कुल मिलाकर टीडीएस कितना कट गया है. यदि आपको अपने पिछले नौकरी वाली जगह से फॉर्म 16 प्राप्त नहीं लिया है, तो आप अपने पुराने संगठन की सैलरी स्लिप का उपयोग कर अपने आईटीआर को जमा कर सकते हैं.

सुनिश्चित करें कि टीडीएस प्रमाण पत्र फॉर्म 26 एएस मैच करे

टैक्स कटौती के बाद ज्यादातर कर्मचारियों को नियोक्ता से वेतन मिलता है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके वेतन से कटौती की गई प्रत्येक टीडीएस किश्त आपके नियोक्ता द्वारा सरकार के खाते में आपके पैन के अगेंट्स जमा की जाती है, आपको अपने फॉर्म 26 एएस के साथ अपने टीडीएस प्रमाण पत्र में उल्लिखित रकम से मेल खाना चाहिए.

फॉर्म 26 एएस वार्षिक टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है जो आपके नाम के तहत जमा किए गए सभी टैक्स को दर्शाता है. आप इसे आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं.

आईटीआर दाखिल करने से पहले, आपको अपने द्वारा भुगतान किए जाने वाले टैक्स की कुल राशि का पता लगाना चाहिए. एक बार जब आप इस राशि को सही तरीके से निर्धारित कर लेते हैं, तो आपको कुल टीडीएस प्रमाण पत्रों में दिखाए गए टीडीएस को घटाना होगा और फिर शेष राशि का भुगतान करना होगा. देय शेष टैक्स नेट बैंकिंग के माध्यम से या बैंक शाखा में जाकर और चालान का उपयोग करके करों का भुगतान करके भुगतान किया जा सकता है.

एक बार जब आप अपनी टैक्स देय राशि का भुगतान कर लेंगे, तो सुनिश्चित करें कि राशि आपके फॉर्म 26 एएस में भी प्रतिबिंबित हो रही है. हालांकि यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि आम तौर पर आईटीआर फाइलिंग के लिए समय सीमा के रूप में कर भुगतान की तारीख और फॉर्म 26 एएस में प्रतिबिंबित होने की तारीख के बीच कई दिनों का अंतर होता है. दूसरी तरफ यदि करों की कटौती आपकी टैक्स लायबिलिटी से अधिक है, तो आपके दायर आईटीआर संसाधित होने के बाद आपको विभाग से टैक्स रिफंड प्राप्त करना चाहिए.

सुनिश्चित करें कि आप अपनी आय के अनुसार लागू सही फॉर्म का उपयोग करके अपना टैक्स रिटर्न दर्ज करें. यदि आप गलत फॉर्म का उपयोग करके आईटीआर दर्ज करते हैं, तो आपको विभाग से धारा 13 9 (9) के तहत नोटिस प्राप्त हो सकता है कि आप निर्धारित समय के भीतर फिर से अपना आईटीआर दर्ज करें. यदि आप दिए गए समय के भीतर एक संशोधित आईटीआर दर्ज करने में विफल रहते हैं, तो यह माना जाएगा कि आपने आईटीआर दायर नहीं किया है.

एक करदाता के रूप में, पिछले वर्ष में अर्जित सभी ब्याज आय की रिपोर्ट करना आपका कर्तव्य है. इस मामले में वित्तीय वर्ष 2017-18 - आईटीआर दर्ज करते समय बहुत से लोग बैंक लॉकर्स, आवर्ती जमा, या बचत बैंक खाते पर अर्जित ब्याज से जुड़े सावधि जमा पर अर्जित अर्जित ब्याज का उल्लेख करना भूल जाते हैं. याद रखें कि बैंक या डाकघर के साथ रखे बचत खातों से अर्जित ब्याज धारा 80 टीटीए के तहत 10,000 रुपये तक कटौती के लिए पात्र है.

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First published: 28 August 2018, 15:18 IST
 
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