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हकीकत बनता जीएसटी, अगले हफ्ते राज्यसभा के एजेंडे में

आकाश बिष्ट | Updated on: 30 July 2016, 16:45 IST

नरेंद्र मोदी सरकार के गले की हड्डी बन चुका वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक अगले हफ्ते राज्यसभा में पेश होगा. सरकार के लिए इसे बड़ी जीत माना जा रहा है. मीडिया खबरों के अनुसार सरकार जीएसटी को लेकर विपक्ष को मनाने में कामयाब रही है और लोक सभा में पहले ही पारित हो चुका ये विधेयक अब राज्य सभा में पारित हो सकता है. 

सत्ताधारी बीजेपी गठबंधन के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है, जिसके कारण उसे इस विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्ष की समर्थन की जरूरत है. जीएसटी विधेयक लोकसभा में मई 2015 में ही पारित हो गया था. 

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माना जा रहा है कि सरकार ने जीएसटी पर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस की मांगें मान ली हैं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली इस इस हफ्ते कई राज्यों के वित्त मंत्रियों से मिले और जीएसटी पर उनका समर्थन सुनिश्चित किया. मंगलवार को जेटली ने विभिन्न दलों के नेताओं से इस मसले पर बात की. 

अंतिम मंजूरी

कांग्रेस ने सरकार के कोशिशों को 'सही दिशा में बढ़ाया गया कदम' बताया है

जेटली से मुलाकात के दौरान कांग्रेस, बीजेडी, टीएमसी, वामपंथी दलों और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जीएसटी में राज्यों हिस्सेदारी पर अपनी चिंताएं साझा कीं. इन दलों ने संशोधित विधयेक का मसौदा देखने के बाद ही अंतिम मंजूरी देने की बात कही है.

सीपीआई के डी राजा ने मीडिया से कहा, "हम इंतजार कर रहे हैं कि केंद्र राज्यों के हितों की रक्षा के लिए क्या प्रस्ताव लेकर आता है."

कांग्रेस ने सरकार के कोशिशों को 'सही दिशा में बढ़ाया गया कदम' बताया है. जेटली ने कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम और आनंद शर्मा से मुलाकात करके उन बिंदुओं पर चर्चा की जिनपर दोनों राष्ट्रीय दल असहमत हैं. मीडिया खबरों के अनुसार बीजेपी नेता जल्द ही शीर्ष कांग्रेसी नेताओं से एक और मुलाकात करने वाले हैं.

राज्यों का हिस्सा

सरकार जीएसटी विधेयक राज्यसभा में लाने के लिए कमर कस चुकी है लेकिन अभी तक इससे जुड़ी धुंध पूरी तरह साफ नहीं हुई है. जीएसटी की अधिकतम दर 18% फीसदी करने पर अभी तक दुविधा की स्थिति है. ये कांग्रेस की प्रमुख मांगों में से एक मांग रही है. 

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कांग्रेस ने राज्यों के लिए 1% फीसदी प्रवेश कर को खत्म करने की भी मांग की है. साथ ही राज्यों से होने वाले विवाद के निपटारे के लिए एक स्वतंत्र संवैधानिक व्यवस्था बनाने की मांग की है. केंद्र सरकार के मूल विधेयक में विवाद का निपटारा जीएसटी काउंसिल के तहत किये जाने का प्रावधान है.   

कांग्रेस ने सरकार से बात करने की जिम्मेदारी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सौंपी है. सदन में पेश किए गए अन्य पांच महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार के लिए कांग्रेस ने पांच सदस्यीय पैनल बनाया है. पी चिदंबरम, आनंद शर्मा, जयराम रमेश, केवी थॉमस और राजीव साटव इसके सदस्य हैं.

कांग्रेस की मदद

केंद्र सरकार केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कई करों की जगह एक अखिल भारतीय जीएसटी लागू करना चाहती है. लेकिन कई राज्यों का मानना है कि इस नए कर से उन्हें नुकसान होगा.

बुधवार को मोदी मंत्रिमंडल ने राज्यों और कांग्रेस की चिंताओं के मद्देनजर दो अहम बदलाव किए. इन बदलाव के तहत केंद्र सरकार ने आने वाले पांच सालों तक राज्यों को होने वाले राजस्व के नुकसान की पूर्ति करने की बात कही है. 

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अगर कांग्रेस की सहमति मिल जाती है तो केंद्र सरकार को केवल एआईएडीएमके और बीएसपी के विरोध का सामना करना पड़ेगा. 243 सदस्यों वाली राज्य सभा में विधेयक को पारित कराने के लिए 163 मतों की जररूत होगी. बीजेपी गठबंधन के पास राज्य सभा में 71 वोट हैं. यानी इस विधेयक को पारित कराने के लिए बीजेपी के लिए कांग्रेस का सहयोग जरूरी है.

संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद इस विधेयक को सभी राज्यों की विधान सभाओं में भी पारित होना आवश्यक है. कांग्रेस की सात राज्यों में सरकार है इसलिए राज्य सभा में पारित होने के बाद भी कांग्रेस की जरूरत बनी रहेगी.

First published: 30 July 2016, 16:45 IST
 
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