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'सिर्फ 1 रूपये' की लड़ाई में हार गई जेट एयरवेज, अब है बर्बादी के कगार पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2019, 14:17 IST

जेट एयरवेज सबसे पुरानी यह देसी निजी एयरलाइन कंपनी है, एविएशन इंडस्ट्री में कभी जेट एयरवेज का सिक्का चलता था और लोग इसमें दी जाने वाली सुविधा के कायल थे. लेकिन अब जेट एयरवेज की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है, इसके पास पायलटों और अन्य कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं है. जेट एयरवेज बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के कर्ज की किस्त नहीं चुका पाई है. लेकिन जेट की इस बदहाली का कारण जानकर अचंभित हो जाएंगे कि कभी जेट एयरवेज को सिर्फ 1 रूपये की जरूरत थी, अगर सही समय पर इस 1 रूपये का प्रबंध कर पाती तो आज इस बदहाली में नहीं पहुंचती.

1 रुपया इफ़ेक्ट

दरअसल, जेट एयरवेज उपलब्ध सीटों पर प्रति किलोमीटर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी इंडिगो एयरलाइन के मुकाबले 1 रुपया ज्यादा खर्च करती है और ये एक रूपये का फर्क ईंधन की लागत को छोड़कर अन्य खर्चों पर आधारित है. साल 2015 के अंतिम महीने में जेट एयरवेज को इंडिगो के मुकाबले प्रत्येक सीट पर प्रति किलोमीटर 50 पैसे ज्यादा कमाई हो रही थी. तब इंडिगो ने जेट को प्रतिस्प्रधा में पछाड़ने के लिए प्लान बनाया और अपना ऑपरेशन 2.5 गुना तेज कर दिया.

इस तरह बढ़ी जेट एयरवेज की मुश्किलें

इंडिगो ने अपने टिकट सस्ते कर दिए जिससे 2016 के पहले नौ महीनों तक इंडिगो के रेवेन्यू में प्रति किलोमीटर 90 पैसे का घाटा हुआ. तब अगर जेट एयरवेज 1 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टिकट सस्ता कर देती तो उसे इंडिगो से मात नहीं मिलती. लेकिन जेट की मजबूरी थी कि क्योंकि तब वह पहले से ही कर्ज में थी. फिर भी जेट प्रबंधन ने इंडिगो की 90 पैसे के मुकाबले प्रत्येक सीट पर 30 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से नुकसान उठाने का फैसला किया. इससे अतिरिक्त घाटा मिलाकर उसके रेवेन्यू में हर सीट पर प्रति किलोमीटर कुल 80 पैसे की दर से नुकसान होने लगा. स्पष्ट है कि जेट का यह प्रयास घातक साबित हुआ और कंपनी को अपनी लागत से कम पर टिकट बेचने पड़े.

ईंधन की कीमतें भी जिम्मेवार

सितंबर 2017 में एविएशन ईंधन की कीमतें बढ़नी शुरू हुईं और लगातार पूरे साल बढ़ती रही. तेल की बढ़ती कीमतों से पूरी एविएशन इंडस्ट्री में भूचाल सा आ गया और पहले से ही पैसों के लिए जूझ रही जेट एयरवेज बर्बादी के कगार पर पहुंच गई. लेकिन राहत की बात ये है कि अब ईंधन की कीमतें फिर से घट चुकी हैं. लेकिन जेट एयरवेज की मुश्किलें इतनी आसानी से कम नहीं होने वाली है क्योंकि मार्च 2021 तक 63 अरब रुपये कर्ज चुकाना है. जेट की वर्तमान ये है कि सितंबर तक उसके पास 124 जहाजों का बेड़ा था जिसमें उसके खुद के महज 16 जहाज थे.

First published: 4 January 2019, 14:12 IST
 
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