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क्या डूबने की कगार पर है कभी सबसे तेजी से बढ़ने वाली एयरलाइन जेट एयरवेज ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 August 2018, 13:22 IST

जेट एयरवेज इंडिया लिमिटेड एक वक़्त हवाई यात्रा के लिए भारत की तेजी से बढ़ती एयरलाइन्स में से एक थी लेकिन ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने एयरलाइन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. एटीहाद एयरवेज पीजेएससी की हिस्सेदारी वाले वाहक के शेयरों ने मुंबई में शुक्रवार को 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. कंपनी के स्टॉक 2011 के बाद से अपने सबसे खराब प्रदर्शन कर रहे हैं. क्योंकि जेट एयरवेज के वित्त में बड़ी गिरावट आई है और इसके कर्जों पर डिफ़ॉल्ट जोखिम बढ़ गया है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, जेट एयरवेज अपने करीब 500 ग्राउंड सर्विस स्टाफ के लिए पिंक स्लिप जारी कर सकती है.  जेट एयरवेज के स्टाफ की कुल संख्या 16,558 है. इसमें ग्राउंड स्टाफ 5,000 के आसपास हैं. जेट अपने स्टाफ की संख्या में 10 प्रतिशत की कटौती कर चाहता है. 

गौरतलब है कि इंडिगो, गोएयर और स्पाइसजेट जैसी बजट एयरलाइंस पिछले दशक में तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे पहली बार ये सेवाएं मध्यम श्रेणी के परिवारों को पूर्ण सेवा वाहक के विकल्प प्रदान कर रही हैं. भारत, दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ प्रमुख विमानन बाजार है लेकिन इसका बने रहने के लिए सबसे मुश्किल तब हुई जब प्रीमियम कैरियर किंगफिशर एयरलाइंस और एयर इंडिया को बार-बार लोन की जरूरत पड़ी.

जेट एयरवेज का मानना है कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो 60 दिन बाद जेट एयरवेज को चलाना मुश्किल हो जायेगा. कंपनी अब इससे बचने के लिए कॉस्ट कटिंग का तरीका अपनाने की योजना बना रही है. इसमें सैलरी कटिंग और अन्य खर्चों को कम करना शामिल है.

अध्यक्ष नरेश गोयल सहित प्रबंधन दल ने मुंबई और दिल्ली में हाल के दिनों में में कर्मचारियों को सूचित किया है कि एयरलाइन की वित्तीय स्थिति खराब है और लागत में कटौती करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सिंगापुर स्थित विश्लेषक राहुल कपूर ने कहा, "जेट एयरवेज को सभी मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है." "तेल की कीमतों में बढ़ोतरी उनकी कमाई पर दोगुनी असर पड़ा है. भारत सबसे कठिन बाजारों में से एक है, जहां एयरलाइंस को दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ रहे मध्यम वर्ग को आकर्षित करने के लिए 1 रुपये (2 सेंट) के आधार मूल्यों पर टिकट बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

2005 में भारतीय टाइकून विजय माल्या द्वारा शुरू की गई किंगफिशर एयरलाइंस देश के अग्रणी वाहकों में से एक थी. ये भारतीय एयरलाइंस एयरबस एसई और बोइंग के लिए सबसे बड़े ग्राहकों में से थे. ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक मुंबई स्थित जेट एयरवेज का कुल ऋण 94.3 बिलियन रुपये (1.4 बिलियन डॉलर) था.

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First published: 10 August 2018, 13:20 IST
 
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