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Jio इंस्टिट्यूट को प्रतिष्ठित संस्थान का दर्जा दिलाने के लिए अंबानी ने खुद दिया था प्रजेंटेशन

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 July 2018, 11:47 IST

प्रस्तावित जियो इंस्टीट्यूट को सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा दिए जाने को लेकर हंगामा मचा हुआ है. इकनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट की माने तो जियो इंस्टिट्यूट को प्रतिष्ठित संस्थान का दर्जा दिलाये जाने के लिए खुद रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी ने चयन कमेटी के सामने प्रजेंटेशन दिया था. रिपोर्ट के अनुसार उनके साथ विनय शील ओबरॉय मौजूद थे. जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव के पद पर रह चुके हैं और रिटायर होने के बाद ओबेरॉय ने रिलायंस ज्वाइन किया था.

रिपोर्ट के अनुसार ओबरॉय के नेतृत्व में 8 सदस्यों की एक टीम पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी की अध्यक्षता वाली एंपावर्ड एक्सपर्ट कमिटी के सामने प्रजेंटेशन आयी. हालांकि कमेटी के हर सवाल जा जवाब खुद मुकेश अंबानी ने दिया. जब वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूट्स या इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेंस की स्कीम की घोषणा केंद्रीय बजट में की गई थी तब ओबेरॉय खुद एचआरडी मिनिस्ट्री में कार्यरत थे.

 

कौन है ओबेरॉय 

1979 बैच के आईएएस ऑफिसर ओबरॉय ने मार्च 2018 के बाद रिलायंस जॉइन किया था. जबकि नियमों के अनुसार रिटायरमेंट के कम से कम एक साल बाद तक आईएएस ऑफिसर कोई व्यावसायिक ऑफर स्वीकार नहीं कर सकते हैं. इस पूरे मामले में केंद्रीय उच्चतर शिक्षा विभाग के सचिव आर सुब्रमण्यम ने सफाई देते हुए कहा कि ‘नियमों के तहत इस दर्जे की तीन श्रेणियां हैं. पहली श्रेणी के तहत सरकारी संस्थानों को रखा जाता है जबकि दूसरी श्रेणी में निजी संस्थान आते हैं. वहीं अंतिम श्रेणी उन संस्थानों के लिए है जो निजी क्षेत्र के निर्माणाधीन संस्थान हैं.’

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First published: 11 July 2018, 11:43 IST
 
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