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45 करोड़ के घाटे में है JNU, 450 संविदा कर्मचारियों को नहीं दे पा रहे सैलरी : प्रशासन

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 November 2019, 14:23 IST

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने गुरुवार को हॉस्टल फीस बढ़ाने के कदम का बचाव करते हुए कहा कि संस्था को 45 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है. दूसरी ओर फीस में संशोधन करने के विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ पिछले तीन सप्ताह से छात्र विरोध कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार जेएनयू प्रशासन ने एक बयान में कहा "विश्वविद्यालय को बिजली और पानी के शुल्क और संविदात्मक कर्मचारियों के वेतन के कारण 45 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठाना पड़ रहा है."

प्रशासन ने दावा किया कि यह 450 संविदा कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने में असमर्थ है क्योंकि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन अब बजट के वेतन से ऐसे भुगतान की अनुमति नहीं देता है. कहा गया है कि ''यूजीसी ने जेएनयू को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालय द्वारा उत्पन्न आंतरिक प्राप्तियों का उपयोग करके गैर-वेतन व्यय में सभी कमी को पूरा किया जाना चाहिए.


इस प्रकार IHA के लिए छात्रों से सेवा शुल्क लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है." प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, प्रत्येक सामान्य छात्र के लिए संशोधित छात्रावास शुल्क लगभग 4,500 रुपये प्रति माह है, जिसमें 2,300 रुपये प्रति माह भोजन शुल्क था.

गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी के छात्रों को 2,200 रुपये की शेष राशि का केवल 50 प्रतिशत का भुगतान करना पड़ता है. इसलिए एक बीपीएल श्रेणी के छात्र को प्रति माह लगभग 3,400 रुपये का भुगतान करना पड़ता है." जेएनयू छात्रावास में रहने वाले 6,000 छात्रों में से 5,371 छात्रों को फेलोशिप और छात्रवृत्ति के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है. 

संस्थान का कहना है कि जेएनयू अन्य विश्वविद्यालयों की तरह डेवलपमेंटल फीस नहीं लेता है. इसके अलावा, जेएनयू में प्रवेश शुल्क दशकों से न्यूनतम है और चार दशकों से अधिक समय से इनमे कोई संशोधन नहीं हुआ है. JNU के छात्र संघ के उपाध्यक्ष साकेत मून ने इसे छात्रों को धमकी देने का प्रयास बताया है.

जेएनयू शिक्षक संघ ने गुरुवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति की बैठक की और संशोधित छात्रावास शुल्कों की पूरी तरह से वापसी की मांग की. सोमवार को सैकड़ों छात्रों को संसद की ओर मार्च करने से रोका गया था. इसमें कई छात्रों के घायल होने की भी खबर है. विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के कारण संसद में हंगामा हुआ. विपक्ष ने सरकार पर छात्रों को दबाने के लिए बल प्रयोग करने का आरोप लगाया.

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First published: 22 November 2019, 14:00 IST
 
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