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Johnson & Johnson ने किया 3,600 मरीजों की ज़िन्दगी से खिलवाड़, बेचे सर्जरी के दोषपूर्ण डिवाइस

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2018, 12:35 IST

जानी-मानी वैश्विक फार्मा कंपनियों में से एक जॉनसन एंड जॉनसन एक बार फिर से सवालों के घेरे में है. भारत में कंपनी पर एक सरकारी रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. सरकारी कमेटी की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की भारतीय शाखा ने देश में सैकड़ों मरीजों की सर्जरी के लिए दोषपूर्ण 'हिप इंप्लान्ट डिवाइस बेचे. यही नहीं कंपनी ने इन डिवाइस को 3,600 लोगों के बेचा और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा.  कंपनी पर आरोप है कि उसने 'हिप इम्प्लांट प्रणाली का आयात किया और इसे बेचा. इस डिवाइस के इस्तेमाल से चार लोगों की मौत की भी बात सामने आयी है.

भारत में कंपनी द्वारा बेचे गए हिप इम्प्लांट डिवाइस पर शिकायतों की जांच के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार की गई थी. इस समिति को 8 फरवरी 2017 को स्थापित किया गया था और उसने अपनी रिपोर्ट 19 फरवरी 2018 को प्रस्तुत की. हालांकि सरकार ने अभी तक इस समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दोषपूर्ण हिप इम्प्लांट 3,600 से अधिक को बेचे गए और और उनका कोई रिकॉर्ड कंपनी के पास नहीं है जिस कारण उन्हें ट्रेस नहीं किया जा सकता. 

नई दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज पूर्व डीन और ईएनटी के प्रोफेसर डॉ अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में समिति ने सिफारिश की है कि जॉनसन प्रत्येक प्रभावित मरीज़ को कम से कम 20 लाख रुपये का भुगतान करे और और रिवीजन सर्जरी के लिए रिइम्बर्शमेंट प्रोग्राम अगस्त 2025 तक चले.

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कंपनी के खिलाफ भारत में पहला आधिकारिक अभियोग का गठन किया जाये. जिसने एएसआर एक्सएल एसीटैबुलर हिप सिस्टम और एएसआर हिप रिसुरफेसिंग सिस्टम को देश में आयात किया और बेचा. इन उपकरणों को वैश्विक स्तर पर 2010 में वापस किया गया था.

समिति ने निष्कर्ष निकाला एएसआर हिप प्रत्यारोपण दोषपूर्ण पाए गए, जिसके परिणामस्वरूप सर्जरी में गड़बड़ी हुई. रिपोर्ट के अनुसार सर्जरी में इन डिवाइसों के इस्तेमाल से मरीजों को और समस्याएं हुईं, फिर उनकी रिवीजन सर्जरी की गई. मेटल ऑन मेटल इंप्लांट से खून में कोबाल्ट और क्रोमियम की बहुत ज्यादा मात्रा हो जाती है, जिससे ये मेटल आयन्स टिशूस और बॉडी ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचाता है. इससे और भी कई स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती हैं. इससे दर्द भी बढ़ता और सक्रियता भी कम होती है.

2005 में संयुक्त राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ने अपनी सहायक कंपनी डीप्यू ऑर्थोपेडिक्स इंक द्वारा निर्मित जेएंडजे के हिप इम्प्लांट डिवाइस में गड़बड़ी पाए जाने के बाद उसे साल 2010 में बंद कर दिया था. समिति के निष्कर्षों के बारे में पूछे जाने पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा "विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट कंपनी समीक्षा के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसलिए हम इसके बारे में टिप्पणी करने के लिए अनुचित होंगे."

इस डिवाइस को इस्तेमाल करे वाले एक मरीज ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि " सर्जरी के बाद मैं हिप प्रतिस्थापन से ठीक होने पर कम से कम छह महीने तक काम नहीं कर सका. ठीक होने के बाद भी, मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि मैं शारीरिक रूप से फिट नहीं था. सर्जरी से गुजरने के फैसले ने मुझे अंदर से पूरी तरह से तोड़ दिया था. अब कंपनी किसी भी मुआवजे का भुगतान करने से इंकार कर देती है.''

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First published: 24 August 2018, 12:20 IST
 
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