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केरल बाढ़ से कॉफी कारोबार पर असर, 44 हजार से ज्यादा लोगों के रोजगार खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 August 2018, 13:02 IST

केरल भारत का दूसरा सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन में पांचवां है. इस सेक्टर से राज्य में 44,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है. वायनाड, त्रावणकोर और नेल्लीपुरथी में कॉफी बागानों की उच्च सांद्रता है. यही इलाके हैं जो केरल बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्याद प्रभावित हुए हैं. केरल कर्नाटक के बाद दूसरी जगह है, जो देश के कॉफी उत्पादन का 70% का योगदान देता है. इनमें से अधिकांश कोडागु क्षेत्र से आता हैऔर और कोडागु में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है.

केरल भारत के कॉफी उत्पादन का 20.8% है. राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से में वायनाड जिला इसका सबसे बड़ा कॉफी पैदा करता है. इसमें अरेबिका और रोबस्टा उद्पादन की प्रमुख किस्में हैं. यहां से लगभग 80% उत्पादन निर्यात किया जाता है. कॉफी केवल 17वीं शताब्दी में भारत आई, और तब से अपनी विशिष्टता स्थापित की है. इसे अक्सर "भारतीय मानसून कॉफी" कहा जाता है. हालांकि, हाल की बारिश ने उत्पादन को कितना नुकसान पहुंचाया है इसका अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सका है.

केरल देश में कॉफी बागान के तहत कुल क्षेत्रफल का 19% है. वायनाड, त्रावणकोर और नेल्लीपुर में कॉफी बागान के तहत 85,000 हेक्टेयर हैं, जो राज्य के लगभग 2% भूमि क्षेत्र हैं. हालांकि यह 77,475 होल्डिंग्स में वितरित किया जाता है, उनमें से अधिकतर 10 हेक्टेयर से कम है. केरल की उत्पादकता को किलो / हेक्टेयर द्वारा मापा जाता है जो 2017-18 में लगभग 774 था.

कर्नाटक के कोडागु का भारत का कॉफी बागान उत्पादन में 25% हिस्सा है, और इसकी उत्पादकता 1,142 किलोग्राम / हेक्टेयर है. कुल मिलाकर, राज्य अपने बागानों में 44,200 लोगों को रोजगार देता है. दूसरे शब्दों में यह देश के कॉफी बागानों में काम करने वाले 7% लोगों का उपयोग करते हुए कॉफी उत्पादन का पांचवां हिस्सा है.

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First published: 22 August 2018, 12:59 IST
 
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