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खुशखबरी: किराएदार और मकान मालिक को होगा ये बड़ा फायदा

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 May 2018, 19:39 IST

आपने देखा होगा कि अक्सर मकान मालिक और किराएदार में मकान के किराए को लेकर विवाद रहता है. कई बार ये विवाद कानूनी पचड़ों में भी फंस जाता है और दोनों का काफी पैसा और समय भी खर्च होता है. लेकिन मोदी सरकार नया मकान किराया कानून लाने जा रही है. इससे मकान मालिक और किराएदार दोनों की परेशानी कम होगी.

मोदी सरकार के इस कानून को कई राज्य सरकारों ने अपनी मंजूरी दे दी है. हालांकि अभी भी कई राज्य इसके पक्ष में नहीं है. जिन राज्यों में केंद्र सरकार को इसे लागू करने में अपनी सहमति दी है, उसमें ज्यादातर भाजपा शासित राज्य है. देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात अपने यहां नया टेनेंसी एक्‍ट लागू करने के लिए तैयार हैं. हालांकि वो इसकी समीक्षा भी कर रहे हैं. ये कानून रेंट कंट्रोल एक्‍ट 1948 को रिप्लेस करेगा.

गौरतलब है कि केंद्र में शासित मोदी सरकार ने साल 2015 में नया मॉडल टेनेंसी एक्‍ट का ड्राफ्ट तैयार किया था. केंद्र सरकार से देश के सभी राज्‍यों से कहा था कि वे इस ड्राफ्ट के मुताबिक अपने राज्‍य में नया रेंट कंट्रोल या टेनेंसी एक्‍ट लागू करें. हालांकि कई भाजपा शासित राज्यों ने इस पर अपना रुख साफ नहीं किया है. ये राज्य हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान हैं.

नये कानून में ये हैं बदलाव-

1- नए एक्‍ट के अनुसार मकान मालिक के लिए किराए का तीन गुना सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका एग्रीमेंट न हो.  किराएदार के घर खाली करने पर मकान मालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी.

2- बिल्डिंग के ढांचे की देखभाल के लिए किराएदार और मकान मालिक दोनों ही जिम्मेदार होंगे. अगर मकान मालिक मकान के ढांचे में कुछ सुधार कराता है तो उसे रेनोवेशन का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी. इसके लिए किराएदार से सलाह करनी जरूरी होगी.
 
3-किरायेदार और मकान मालिक के बीच हुए किसी भी तरह के विवाद को रेंट अथॉरिटी द्वारा सुलझाया जाएगा. रेंट संबंधी किसी भी तरह के विवाद की सुनवाई कोर्ट में नहीं होगी.   
First published: 14 May 2018, 19:39 IST
 
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