Home » बिज़नेस » Lava Mobile: Modi's Make in India showed the dream, now not even money for salaries
 

इस भारतीय मोबाइल कंपनी को नोटबंदी ने कर दिया बर्बाद, आज सैलरी के लिए भी नहीं हैं पैसे

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 December 2018, 14:08 IST

जब मोदी सरकार ने 'मेक इन इंडिया' अभियान शुरू किया तो फोन निर्माता लावा इंटरनेशनल लिमिटेड को इस अभियान के पोस्टरबॉय के रूप में देखा रहा था. लेकिन आज इस नौ साल पुरानी कंपनी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. आज कंपनी समय पर कर्मचारियों को भुगतान नहीं कर पा रही है. भारतीय बाजार में चीन की मोबाइल कपनियों की प्रतिस्पर्धा और ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बड़ी छूट के साथ साथ नोटबंदी ने कंपनी के कामकाज में उथल पुथल मचा दी है. कंपनी वितरकों का भुगतान नहीं कर पाई, जिसने आपूर्तिकर्ताओं को भी प्रभावित किया.

नवंबर में कर्मचारियों के भुगतान के लिए पैसे नहीं

कंपनी के चेयरमैन हरि ओम राय ने कर्मचारियों को संबोधित एक दिसंबर को एक पत्र में कहा कि नवंबर के वेतन में देरी होगी और दो हिस्सों में भुगतान किया जाएगा. नोएडा-मुख्यालय वाली इस कंपनी ने आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान पूरा नहीं किया. राय ने कहा "हमारे आपूर्तिकर्ताओं को देर से भुगतान या कम भुगतान के कारण संघर्ष करना पड़ा. पिछले 9 सालों में लावा के साथ और 26 साल के मेरे व्यावसायिक सफर में कभी ऐसा समय नहीं आया, जब लोगों के वेतन में देरी हुई हो. लेकिन इस समय हमारे पास वेतन में देरी करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था''.

 

उन्होंने कहा ई बैंड के कर्मचारियों को 60% वेतन का भुगतान किया जाएगा और उपरोक्त ई बैंड को 1 दिसंबर को वेतन का 40% भुगतान किया जाएगा. राय ने पत्र में कहा, शेष राशि 20 दिसंबर को भुगतान की जाएगी. भारतीय मोबाइल कंपनियों के सामने इस तरह का संकट पिछले कुछ समय से चलता आ रहा है.

चीनी मोबाइल फोन ब्रांड घरेलू बिक्री पर हावी हैं. इंटरनेशनल डेटा कॉर्प द्वारा जुलाई-सितंबर तिमाही के स्मार्टफोन बिक्री आंकड़ों के मुताबिक, शीर्ष पांच में तीन कंपनियां चीनी-शाओमी की 27.3% बाजार हिस्सेदारी हैं, इसके बाद सैमसंग (22.6%), विवो (10.5%), माइक्रोमैक्स (6.9% ) और ओपीपीओ (6.7%) के साथ मैदान में हैं.

राय का कहना है "हम पिछले तीन वर्षों में लगातार व्यवधान का सामना कर रहे हैं. रिटेल और और मार्केटिंग पर अधिक निवेश करने की क्षमता वाली चीनी कंपनियां बाजार पर हावी हैं. यहां तक कि नोटबंदी के कारण आर्थिक मंदी ने उपभोक्ताओं के हमारे वर्ग को काफी हद तक प्रभावित किया''

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा फरवरी में जारी एक रिपोर्ट में नोटबंदी के प्रभाव भी पुष्टि की गई है. 8 नवंबर 2016 को उच्च मूल्य मुद्रा नोटों के बंद होने के चार महीने बाद जहां भारतीय हैंडसेट निर्माता स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट आयी है. लावा के देशभर में 165,000 खुदरा विक्रेता हैं. कई खुदरा विक्रेताओं ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर भारी छूट के कारण ऑनलाइन नकद भुगतान पर बहुत सारे शेयर खरीदे लेकिन अभी भी उनकी दुकान में फुटफॉल्स की कमी के कारण वे अपना स्टॉक नहीं बेच सके.

First published: 18 December 2018, 14:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी