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क्यों गलत है मूडीज़ की रेटिंग पर मोदी सरकार का हमला

नीरज ठाकुर | Updated on: 13 November 2015, 14:28 IST
QUICK PILL

  • मूडीज़\r\nएनालिटिक्स की एक रिपोर्ट पर\r\nप्रतिक्रिया देते हुए नरेंद्र\r\nमोदी सरकार भूल गयी थी कि कुछ\r\nमहीने पहले उसी रिसर्चर ने\r\nउसकी तारीफ की थी.
  • इस\r\nविवाद के बाद नरेंद्र मोदी\r\nसरकार मूडीज़ से सीख सकती है\r\nकुछ सबक

एनडीए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय संस्था मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट की जिस तरह आलोचना की उससे ऐसा लगता है कि जैसे उसे मूडीज और बीजेपी के काम करना का तरीका एक जैसा ही लगता है.

कुछ हफ्ते पहले अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज कॉरपोरेशन की एक शोध शाखा मूडीज एनालिटक्स ने नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार अपने मंत्रियों के भड़काऊ भाषणों को नियंत्रित करने में अक्षम रही है जिसके कारण भारत के अंदर और बाहर सरकार की छवि खराब हो रही है. भारत सरकार की प्रतिक्रिया से लगता है कि जैसे उसका मानना है कि मूडीज एनालिटिक्स का अपने विश्लेषकों पर कोई नियंत्रण नहीं है.

मूडीज के रिपोर्ट का खंडन करते हुए सरकार ने कहा था, "ये हैरान कर देने वाली बात है कि इसे तैयार करने में जरूरी कवायद नहीं की गयी और न ही पाठकों को मूडीज एनालिटिक्स और मूडीज इनवेस्टर सर्विसेज के अंतर के बारे में बताया गया. मूडीज एनालिटिक्स में काम करने वाले एक जूनियर एसोसिएट इकोनॉमिस्ट (जूनियर सहायक अर्थशास्त्री) की राय को इस तरह से पेश किया गया जैसे वो मूडीज एनालिटिक्स की राय हो."

हालांकि, मूडीज ने अपने विश्लेषक फराज सैयद की लिखी रिपोर्ट का तुरंत समर्थन किया. ईमेल से दिए गये एक जवाब में मूडीज ने कहा, "जो रिपोर्ट प्रकाशित की गई है वो मूडीज एनालिटक्स की इकोनॉमिक आउटलुक सीरिज का एक हिस्सा है. इस रिपोर्ट के केवल एक हिस्से में राजनीतिक घटनाक्रमों के संभावित आर्थिक प्रभावों की समीक्षा की गई है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे या नजरिये की वकालत की गई है. मूडीज एनालिटिक्स आर्थिक शोध और विश्लेषण उपलब्ध कराने वाली संस्था है जो रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर सर्विस से अलग एक कंपनी है."

मूडीज ने मूडीज रेटिंग एजेंसी और मूडीज एनालिटिक्स के बीच का अंतर तो साफ कर दिया लेकिन उसके बयान से जाहिर है कि वो "इंडिया आउटलुकः सर्चिंग फॉर पोटेंशियल" रिपोर्ट के लेखक के साथ है

मौजूदा विवाद से एनडीए सरकार को दो सबक जरूर लेने चाहिए. एक, किसी भी संगठन चाहे वो एक राजनीतिक पार्टी हो या फिर कोई रेटिंग एजेंसी हो या उसकी आर्थिक शोध एवं विश्लेषण शाखा, में काम करने वालों की कलम या जुबान से निकले शब्दों के लिए वो संस्था ही जिम्मेदार होती है.

मोदी सरकार को खुद को अल्पसंख्यकों के खिलाफ उनके नेताओं द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों से खुद को अलग करना पड़ा क्योंकि उससे यह संदेश जा रहा था कि इन नेताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई नियंत्रण नहीं है. मूडीज एनालिटिक्स ने भी अपनी रिपोर्ट में इसी बात पर जोर दिया गया है.

मूडीज कॉरपोरेशन जैसे पेशेवर संगठनों में किसी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले उसे कई स्तरों पर जाँचा जाता है. इसी वजह से उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिया जाता है. इसी विश्वसनियता के कारण दुनियाभर के निवेशक उन्हें गंभीरता से लेते हैं.

दूसरी तरफ लोक सभा चुनाव के दौरान मोदी सरकार ने विकास का जो वादा किया था उसपर अमल करने में काफी विफल रही है.

इस रिपोर्ट के खारिज करते समय एनडीए सरकार ये भूल गयी कि मूडीज के इसी एसोसिएट एनालिस्ट फराज सैयद ने अप्रैल 2015 में उसकी तारीफ की थी.

अपनी अप्रैल की रिपोर्ट में सैयद ने लिखा था, "भारत की अर्थव्यवस्था तेज विकास की तरफ बढ़ रही है. भविष्योन्मुखी इंडिकेटर इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि भारत में घरेलू मांग रफ्तार पकड़ रही है."

सैयद की लिखी रिपोर्ट में मूडीज एनालिटिक्स ने इस बात की सराहना की थी कि सरकार मुद्रास्फीति की दर कम रखने में सफल रही है. जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को 2015 की शुरुआत में ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट्स घटाने में मदद की. जिससे निजी क्षेत्र पर बढ़ता दबाव कम हुआ था.

सैयद की टिप्पणी थी, "कम ब्याज दर के साथ-साथ सरकार के बुनियादे ढांचे और विनिवेश कार्यक्रमों सेे घरेलू उन्मुख उद्योगों (डोमेस्टिक ओरिएंटेडेड इंडस्ट्रीज) को बढ़ावा मिलना चाहिए."

मूडीज दुनिया की टॉप तीन रेटिंग एजेंसियों में से एक है. सरकार को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि मूडीज की भारत को लेकर सबसे सकारात्मक राय है. वहीं, अन्य शीर्ष दो एजेंसियों स्टैंडंर्ड्स एंड पूअर्स और फिच रेटिंग्स ने भारत को 'स्टैबल' (स्थिर) रेटिंग दी है.

ये सरकार के हित में है कि वो समझे कि किसी भी संगठन को उसके लिए काम करने वालों की कृत्यों के लिए जवाबदेह होता है. मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियां उनकी निवेशकों के प्रति जवाबदेह हैं जो उनकी सेवाएं लेती हैं. एनडीए सरकार भारत की जनता के प्रति जवाबदेह है जिसने विकास के लिए उसे वोट दिया. विडंबना ये है कि भारत की मौजूदा सरकार ज्यादातर उन चीजों के लिए खबरों में रहती है जिसका उसने कोई वादा नहीं किया था

First published: 13 November 2015, 14:29 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

As a financial journalist, his interface with the two dominant 'isms'- Marxism and Capitalism- has made him realise that an ideal economic order of the world would lie somewhere between the two. Associate Editor at Catch, Neeraj writes on everything related to business and the economy. He has been associated with Businessworld, DNA and Business Standard in the past. When not thinking about stories, he is busy playing with his pet dog, watching old Hindi movies or searching through the Vividh Bharti station on his Philips radio transistor.

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