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क्या भारत विजय माल्या को ला पाएगा?

सौरभ दत्ता नीरज ठाकुर | Updated on: 10 March 2016, 23:06 IST

लोगों से खुद को दिवालिया न कहने की अपील करने के बाद पता चला कि ध्वस्त हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन्स के चेयरमैन विजय माल्या भारत छोड़कर विदेश जा चुके हैं.

बुधवार को, भारत के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि शायद विजय माल्या दो मार्च को ही भारत की सीमा से बाहर चले गए हैं.

सोमवार को, ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (DRT) ने बहुराष्ट्रीय कंपनी डियाजियो से हुए सौदे के 75 मिलियन डॉलर यानी 515 करोड़ रुपए माल्या को देने से इनकार कर दिया था.

भारतीय स्टेट बैंक उन 17 ऋणदाता बैकों के संघ का मुखिया है, जिन्होंने किंगफिशर एयरलाइन्स को ऋण दिया था

रोका गया पैसा शराब की दिग्गज ब्रिटिश कंपनी डियाजियो के साथ माल्या के समझौते का एक हिस्सा था. अप्रैल 2015 में माल्या को डियाजियो के मालिकाना हक वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स के चेयरमैन पद से बाहर कर दिया गया था. यह कदम आंतरिक जांच में यह साबित होने के बाद लगाया था कि माल्या ने कंपनी का पैसा अपने यूनाइटेड ब्रेवरिज ग्रुप की कंपनियों, विशेषकर किंगफिशर में स्थानांतरित किया था.

डियाजियो ने माल्या के यूबी ग्रुप की कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स में नियंत्रण लायक हिस्सेदारी से वर्ष 2014 में खरीद ली थी.

ऋण वसूली ट्रिब्यूनल ने माल्या के खिलाफ निर्णय भारतीय स्टेट बैंक की एक शिकायत के बाद दिया. भारतीय स्टेट बैंक उन 17 ऋणदाता बैकों के संघ का मुखिया है, जिन्होंने किंगफिशर एयरलाइन्स को ऋण दिया था.

पढ़ें: माल्या गए नहीं, भाग भी गए तो भारत क्या कर लेगा?

कर्मचारियों के साथ-साथ ऋणदाताओं को अचानक मंझधार में छोड़कर किंगफिशन एयरलाइन्स ने वर्ष 2012 में अपनी सेवाएं बंद करने की घोषणा कर दी थी. इसका चेयरमैन होने के नाते, माल्या के सिर पर विभिन्न भारतीय बैंकों का करीब 7,500 करोड़ रुपए का कर्ज है.

माल्या के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं. ये संस्थाएं माल्या के खिलाफ किंगफिशर एयरलाइन्स के ऋण के गबन और दुुरुपयोग की भी जांच कर रही हैं.

विजय माल्या: एक घोषित दिवालिए को स्टेट बैंक देश छोड़ने से रोक पाएगा?

तमाम बैंकिंग शर्तों और नियमों को दरकिनार कर नेगेटिव क्रेडिट रेटिंग और घाटे के बावजूद अपनी एयरलाइन को 900 करोड़ रुपए का ऋण सुनिश्चित करने के लिए आईडीबीआई बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ "सांठगांठ" के मामले में माल्या सीबीआई के जांच के दायरे में भी है. सीबीआई ने इस संबंध में माल्या से दिसंबर 2015 में पूछताछ भी की थी.

अदालत के भीतर क्या हुआ

ऋणदाताओं के संघ (कंसोर्टियम) के एक वकील नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इसलिए लाना पड़ा, क्योंकि विभिन्न कानूनी मंचों ने माल्या को रोकने के लिए तत्परता से कार्रवाई से इनकार कर दिया था. इनमें बेंगलुरू स्थित ऋण वसूली ट्रिब्यूनल और कर्नाटक उच्च न्यायालय भी शामिल थे.

माल्या पर भारतीय बैंकों के बकाया हैं 7500 करोड़ रुपए

ऋणदाता अपील कर रहे थे कि माल्या का पासपोर्ट जब्त कर लिया जाना चाहिए ताकि वह भारत छोड़कर विदेश न जा पाए. हालांकि जैसा कि कैच न्यूज ने पहले ही समाचार प्रकाशित किया था, माल्या का पासपोर्ट जब्त करने की प्रक्रिया संवैधानिक अड़चनों में फंसकर रह गई.

कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी किया है और 30 मार्च तक जवाब के साथ उपस्थित होने को कहा है

अतः वैकल्पिक उपाय के तौर पर ऋण दाताओं के वकीलों ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि माल्या का पासपोर्ट कोर्ट अपने कब्जे में ले ले और माल्या सिर्फ अदालत की अनुमति से ही देश से बाहर जा सके.

लेकिन दिनभर की सुनवाई के पश्चात अदालत ने ऐसा कोई कदम उठाने से इनकार कर दिया. इसकी बजाय, अदालत ने माल्या और माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रिवरेज होल्डिंग्स लिमिटेड को नोटिस जारी कर दिया और दोनों को 30 मार्च तक जवाब के साथ उपस्थित होने को कहा गया.

पढ़ें: विजय माल्या को कोर्ट से झटका, बैंक से पैसे निकालने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि माल्या को उनके राज्यसभा के अधिकृत ईमेल एड्रेस पर नोटिस जारी किया जाए. इसके बाद सिर्फ इंतजार ही किया जा सकता था कि माल्या जवाब देंगे या नहीं.

यदि वह भारत छोड़कर विदेश जा चुके हैं तो सरकार माल्या को वापस कैसे लाएगी? यदि माल्या ने किसी ऐसे देश में शरण ले ली, जिसके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है, तो क्या सरकार कभी माल्या को वापस ला पाएगी? सबसे महत्वपूर्ण, यदि माल्या की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया के बाद भी उनके द्वारा लिए गए विशाल ऋण का लेश-मात्र भी नहीं वसूला जा सका तो अगला कदम क्या हो सकता है?

लंदन के साथ भारत का अपराधियों के प्रत्यर्पण का रिकॉर्ड

अपराधियों और भगोड़ों को ब्रिटेन से वापस लाने के मामले में भारत का रिकॉर्ड बुरा ही रहा है. उदाहरण के तौर पर, बॉलीवुड के म्यूजिक डायरेक्टर नदीम-श्रवण, जिन दोनों का हाथ कथित तौर पर भारत के संगीत मुगल गुलशन कुमार की मुम्बई में हुई हत्या में हाथ था, वे दोनों ब्रिटेन की राजधानी में आजादी से सुरक्षित अभयारण्य की तरह आनंद उठा रहे हैं.

ऐसा ही एक और उदाहरण है इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व आयुक्त ललित मोदी. प्रवर्तन निदेशालय ने जैसे ही ललित मोदी के खिलाफ जांच शुरू की, वह भी लंदन उड़ गए थे.

अपराधियों और भगोड़ों को ब्रिटेन से वापस लाने के मामले में भारत का रिकॉर्ड बुरा ही रहा है

ऋण दाताओं के संघ के वकीलों में से एक वकील कहते हैं कि "यह बेहद खतरनाक कानूनी स्थिति है." वकील कहते हैं, "जहां तक वर्तमान कानूनों की बात है तो यदि माल्या ने किसी ऐसे देश में शरण ले ली जिसके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नही है तो फिर मौजूदा कानून इतने सशक्त नहीं हैं कि वे माल्या को वहां से वापस ला सकें."

वह कहते हैं, 'यह सब सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करेगा कि कानूनी प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए वो किस तरह के निर्देश देता है.'

यह सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि अब भारत सरकार आतंकवाद में संलिप्त और कुख्यात गैंगेस्टर अबू सलेम की तरह (पुर्तगाल से भारत की कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं थी) से वापस लाने की रणनीति अपनाएगी?

First published: 10 March 2016, 23:06 IST
 
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