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PMO कर रहा है इस योजना पर काम, पेट्रोल-डीजल की मुश्किल हो जाएगी ख़त्म

सुनील रावत | Updated on: 11 September 2018, 11:55 IST

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 5,500 करोड़ ($ 75 9 मिलियन) का प्रस्ताव रखा है. सरकार इस फंड का अधिकतम इस्तेमाल लिथियम आयन बैटरी के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए करना चाहता है, जो कि ऐसे वाहनों के लिए बेहद जरूरी है. पिछले हफ्ते पीएमओ ने भारी उद्योग विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को वापस कर दिया, जिसने पूरी तरह से विद्युत वाहनों (ईवीएस) के लिए प्रोत्साहन मांगा गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार पीएमओ ने विभाग से योजना को फिर से तैयार करने के लिए कहा है. लिथियम आयन बैटरी के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के तरीकों को शामिल करने के लिए अपनी कीमतों को कम करने के साथ-साथ बैटरी संचालित वाहनों को भी शामिल किया है.

पीएमओ ने 6 और 7 सितंबर को नई दिल्ली में हुई वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलन के पहले संस्करण से पहले इस पर फैसला सुनाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योग जगत को इस पर सम्बोधित किया था. गौरतलब है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार चाहती है कि भारत में बैटरी की लागत को कम करने के लिए कदम उठाए जाएं जो वाहनों को सस्ते बनाने में मदद करेंगे. भारत लिथियम या कोबाल्ट का उत्पादन नहीं करता है और इसे तब तक स्थनइया आयात किया जा सकता जब तक कि यह लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लिथियम समृद्ध क्षेत्रों में खानों को प्राप्त न हो.

पीएमओ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों, विशेष रूप से बैटरी बनाने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहता है और सौर ऊर्जा उत्पादन नतीजे को दोहराना नहीं चाहता, जिसमे स्थानीय उत्पादन से ज्यादा विभिन्न देशों से पैनलों का आयात किया गया. इस मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि बैटरी विनिर्माण घरेलू बाजार में नहीं उठाता है और भविष्य में लागत कम नहीं होती है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए मुश्किल पैदा होगी. पीएमओ भी भारत को बैटरी बनाने का केंद्र बनाना चाहता है, जिससे बहुत सारे रोजगार पैदा होंगे. वे नहीं चाहते कि ईवी विनिर्माण सौर मार्ग पर जाएं जहां बड़े पैनल आयात किए जाते हैं.

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग योजना के दूसरे चरण में केंद्र सरकार द्वारा एक घोषणा की उम्मीद कर रहा है, जिसमें पहले चरण में स्वीकृत 700 करोड़ रुपये की तुलना में 5,500 करोड़ का प्रस्तावित राशि लगभग आठ गुना अधिक है. केंद्र सरकार इसी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से प्रदूषण को कम करना चाहता है. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और हुंडई मोटर कंपनी जैसी कंपनियों ने पहले से ही भारत के में अपनी इलेक्ट्रिक वाहन योजनाओं का अनावरण किया है, जहां लगभग 3 मिलियन जीवाश्म ईंधन संचालित यात्री वाहन सालाना बेचे जाते हैं.

मारुति की पेरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्प ने भारत में छोटे इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के लिए टोयोटा मोटर कॉर्प की से भागीदारी की है, और गुजरात में लिथियम-आयन बैटरी विनिर्माण संयंत्र बनाने के लिए डेन्सो कार्पोरेशन और तोशिबा कार्पोरेशन के साथ मिलकर काम कर रही है.
इस साल की शुरुआत में महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड और दक्षिण कोरिया के एलजी केम ने लिथियम-आयन बैटरी तकनीक पर सहयोग करने की अपनी योजना की घोषणा की है.

5 सितंबर को भारत के वार्षिक सत्र के उद्योग लॉबी ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के दौरान, भारी उद्योगों के केंद्रीय मंत्री अनंत गीते ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सरकार की नीति थिंक टैंक द्वारा आयोजित वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलन में फेम योजना के दूसरे चरण का अनावरण करना था.

अगस्त में एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में सरकार ने एफएएम योजना के दूसरे चरण के लिए 5500 करोड़ रूपये मंजूर किए. इसमें पूरे देश में वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये भी शामिल होंगे. सरकार देशव्यापी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए सब्सिडी के रूप में 1,000 करोड़ रूपए देने की योजना बना रही है.

First published: 11 September 2018, 11:42 IST
 
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