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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : आगे बढ़ रही हैं महिलाएं, लोन और इंश्योरेंस के मामले में पुरुषों से आगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 March 2019, 12:04 IST

ट्रांस यूनियन सिबिल के एक अध्ययन में कहा गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में महिला कर्जदारों के लिए ऋण वितरण में 2015 और 2018 के बीच 48% की वृद्धि देखी गई है. जबकि यह पुरुषों में 35% है. अध्ययन बैंकों, वित्तीय संस्थानों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के क्रेडिट की जानकारी पर आधारित है.

अध्ययन के अनुसार पिछले चार वर्षों में महिलाओं को 56.4 मिलियन खातों में सोने के मुकाबले ऋण दिया गया. हालांकि 2018 में मांग में 13% की गिरावट आई थी. इस बीच 2017 और 2018 के बीच उपभोक्ता ऋण, व्यक्तिगत ऋण और दोपहिया ऋणों की मांग में क्रमश: 31%, 19% और 14% की वृद्धि हुई है.

 

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों की माने तो पिछले एक दशक में कार्यबल (workforce) में महिलाओं की समग्र भागीदारी में गिरावट आई है. जबकि जीवन बीमा पॉलिसियों के आंकड़े बताते हैं कि औपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी वास्तव में 2017-18 तक अधिक हो सकती है.

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं ने 2017-18 में भारत में बेची गई कुल व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों का 32% हिस्सा खरीदा. दूसरी ओर ILO के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय कर्मचारियों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी 2017 में 27.21% घटकर 2005 में 36.78% हो गई.

2017-18 में जारी व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों की कुल संख्या 28.2 मिलियन थी, जिनमें से लगभग 9 मिलियन महिलाओं द्वारा और 19.1 मिलियन पुरुषों द्वारा खरीदे गए थे. पॉलिसियों में टर्म इंश्योरेंस, ट्रेडिशनल प्लान के साथ-साथ यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान या यूलिप जैसे इंश्योरेंस प्रोडक्ट शामिल थे. विशाखा के अनुसार स्पष्ट आंकड़ों का अभाव होने के बावजूद, अधिक महिलाएं, पुरुषों की तुलना में टर्म प्लान के बजाय जीवन बीमा स्थिर से बचत और निवेश उत्पादों के प्रति झुकाव रखती हैं.

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First published: 8 March 2019, 12:02 IST
 
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