Home » बिज़नेस » Catch Hindi: maharashtra's beveries are at stake due to court order
 

महाराष्ट्रः आईपीएल के बाद अब शराब उद्योग पर 'जल संकट'

अश्विन अघोर | Updated on: 23 April 2016, 12:27 IST

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त मराठवाड़ा स्थित औरंगाबाद जिले के शराब कारखानों की किस्मत अधर में लटकी हुई है क्योंकि बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खण्डपीठ ने क्षेत्र में भयंकर सूखे के मद्देनज़र राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जिले के करीब 19 कारखानों को पानी की आपूर्ति रोक दी जाए.

अहमदनगर जिले के कोपरगांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संजय काले की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस संगीतराव पाटील की एक खण्डपीठ ने यह निर्देश जारी किया है.

पढ़ेंः क्या लातूर की राह पर है हैदराबाद?

ऐसा इस हफ्ते में दूसरी बार है जब पानी की बर्बादी पर न्यायपालिका ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किया है. पिछले हफ्ते बंबई उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा था कि 30 अप्रैल के बाद महाराष्ट्र में होने वाले आईपीएल के सभी क्रिकेट मैचों को राज्य से बाहर करवाया जाए.

इस संबंध में दायर जनहित याचिका में याची एनजीओ लोकसत्ता मूवमेंट ने दलील दी थी कि क्रिकेट मैचों पर लाखों लीटर पानी बर्बाद किया जाता है. एनजीओ ने दावा किया था कि हर मैच से पहले मैदान और पिच को तैयार करने में 60 लाख लीटर पानी खर्च होता है और सूखे के मद्देनज़र राज्य इसे गंवारा नहीं कर सकता. 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठवाड़ा के 19 शराब कारखानों की पानी आपूर्ति रोकने का आदेश दिया है

राज्य सरकार को शुक्रवार (22 फरवरी) तक का वक्त इस बात पर अपना पक्ष रखने के लिए दिया गया था कि क्या मानसून के आने तक 40 दिनों के लिए शराब कारखानों को पानी की आपूर्ति रोकी जा सकती है. सरकार यदि अपना पक्ष रखने में नाकाम रहती है तब अदालत इस संबंध में एक आदेश जारी कर सकती है. 

सूखे की भयावह स्थिति और तकरीबन पूरी तरह सूख चुके जायकवाड़ी बांध का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने न्यायालय को सूचना दी थी कि अगले 105 दिनों तक पानी की सुगम आपूर्ति के लिए एक योजना तैयार की जा चुकी है.

राज्य ने न्यायालय को इस बात से अवगत कराया कि शराब उद्योग में 20 फीसदी और अन्य उद्योगों में 10 फीसदी जलापूर्ति की कटौती की गयी है. यह कटौती 17 अप्रैल से 30 अप्रैल तक लागू रहेगी. इससे पहले प्रखण्ड आयुक्त को शराब समेत हर श्रेणी के उद्योगों को दिए जाने वाले पानी पर एक विस्तृत रिपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया गया था.

पढ़ेंः भारत और विदेशों में शराबबंदी का इतिहास

सूखा प्रभावित मराठवाड़ा में समाज के हर तबके की ओर से यह मांग उठ रही है कि शराब के कारखानों और गन्ना मिलों को पानी की आपूर्ति रोकी जाए. न केवल कांग्रेस बल्कि सरकार की घटक शिवसेना भी इन उद्योगों, खासकर शराब के कारखानों को पानी की पूरी तरह कटौती के लिए आक्रामक तरीके से दबाव बना रही है. दोनों पार्टियां इस मसले पर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही हैं.

शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने इस मामले में अपना पक्ष ठोस तरीके से रखते हुए कहा है कि जब मराठवाड़ा के लोगों के पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है, ऐसे में शराब के कारखानों को जलापूर्ति के लिए प्राथमिकता नहीं दी जा सकती.

मराठवाड़ा के सभी उद्योगों को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआइडीसी) से करीब 4 एमएलडी पानी मिलता है चूंकि यह जिम्मेदारी निगम की ही है. अपना नाम न छापने की शर्त पर औरंगाबाद के एक उद्योगपति ने कहा, ''हम जानते हैं कि राज्य में हालत बुरी है और पानी के न्यायपूर्ण वितरण व उपभोग के लिए तीव्र उपायों को लागू किए जाने की जरूरत है. इसके लिए उद्योगों का पानी काट देना कोई समाधान नहीं हो सकता क्योंकि यही उद्योग सूखे से विस्थापित लोगों को रोजगार मुहैया कराते हैं.''

पढ़ेंः मराठवाड़ा से बुंदेलखंड तक एक ही कहानी

उच्च न्यायालय ने ऐसी ही एक दलील पर दिलचस्प प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राज्य के जौहरी जिस तरह पिछले महीने हुई हड़ताल के दौरान अपने कर्मचारियों को पगार देते रहे, वैसे ही शराब के कारखाने भी अपने कर्मचारियों को 40 दिनों तक भुगतान करने में सक्षम हैं. औरंगाबाद में कुल मिलाकर शराब की 16 ब्रेवरी और डिस्टिलरी हैं. इनमें भारतीय शराब निर्माता युनाइटेड ब्रेवरीज़ से लेकर कार्ल्सबर्ग और सैब मिलर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं.

हाई कोर्ट ने जल संकट को देखते हुए 1 मई के बाद महाराष्ट्र में होने वाले आईपीएल मैचों पर रोक लगा दी है

उद्योगपति का कहना था कि राज्य का विनिर्माण उद्योग पानी की कमी से पहले से ही जूझ रहा है और पूरी तरह जलापूर्ति को रोक देने का लोकरंजक फैसला स्थिति को बदतर ही बनाएगा. उन्होंने कहा, ''जो लोग ऐसी मांग कर रहे हैं, उन्हें और सरकार को पहले यह पता करना चाहिए कि पानी का इस्तेमाल करने वाले उद्योग कितने रोजगार पैदा कर रहे हैं. आप बड़ी आसानी से पानी के प्रति लीटर पर रोजगार सृजन का आंकड़ा पता कर सकते हैं.''

राज्य में कुल 129 ब्रेवरी हैं. इनमें से 99 बीयर निर्माता, भारत में विदेशी शराब बनाने वाली और भारतीय शराब निर्माता इकाइयां हैं. बाकी ब्रेवरी चीनी मिलों से जुड़ी हुई हैं. फिलहाल, जालना, बीड, परभणी और हिंगोली जिलों में ऐसी सारी इकाइयां ठप पड़ी हुई हैं.

पढ़ेंः 'पानी का केवल प्यास से नहीं नौकरी से भी सीधा संबंध'

औरंगाबाद जिले में ऐसी 11 इकाइयां हैं जबकि नांदेण, लातूर और उस्मानाबाद में दो-दो इकाइयां ही कार्यरत हैं. अधिकतर शराब कारखाने पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर, अहमदनगर, पुणे और विदर्भ के नागपुर में स्थित हैं. राज्य सरकार द्वारा औरंगाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे के मुताबिक सोलापुर जिले में 15, अहमदनगर जिले में 10, पुणे में 7 और नागपुर जिले में 13 कारखाने मौजूद हैं.

लोगों के बढ़ते दबाव के बाद अब जबकि न्यायपालिका ने भी पानी का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले उद्योगों की जलापूर्ति में कटौती का गंभीर फैसला ले लिया है, राज्य सरकार भी घरेलू और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पानी के न्यायपूर्ण वितरण की ओर कदम उठा रही है.

मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोम्बिवली, पुणे जैसे शहरों में जहां हफ्ते में दो से तीन दिन पानी की कटौती हो रही है वहीं मुंबई मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के उद्योगों को भी हफ्ते में तीन दिन कटौती का सामना करना पड़ रहा है.

First published: 23 April 2016, 12:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी