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मारुति-सुजुकी की कारों की बैटरी अब एक नहीं पांच साल से ज्यादा चलेगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2018, 13:51 IST

भारत में सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली जापानी की कंपनी सुजुकी मोटर कार्पोरेशन अपनी भारत में बेचे जाने वाली वाली प्रीमियम कारों में नई तरह की लिथियम-आयन बैटरियां फिट करने जा रही है. कंपनी इन बैटरियों को गुजरात में अपने वित्त वर्ष 21 में शुरू होने वाले अपने बैटरी संयंत्र से बनाएगा.

लंबे समय तक चलने वाली लिथियम-आयन बैटरी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड द्वारा बेची गई कारों में लगी परंपरागत लीड-बैटरी को रिप्लेस करेगी. लिथियम-आयन बैटरी स्विफ्ट हैचबैक में फिट होगी और सभी मॉडल जो इससे अधिक महंगे हैं,उनमे यह बैटरी लगायी जाएगी.

सुजुकी का मानना है कि इससे उनके लाभ में दोगुनी वृद्धि होने की उम्म्मीद है. क्योंकि यह सोर्सिंग की जाने वाली लीड बैटरी से लागत में फायदा देगी. मारुति भारत में कुल कारों का 50% बेचती है. यदि वे लिथियम-आयन बैटरी के साथ 1 मिलियन कारों को फिट करने में कामयाब होते हैं, तो यह संख्या में बहुत ज्यादा होगी.

इसके अलावा यह खरीदी गई लीड बैटरी से सस्ती होगी. लीड की कीमत लगातार बढ़ रही है. गौरतलब है कि सुजुकी 1,152 करोड़ के अनुमानित निवेश पर तोशिबा कार्पोरेशन और डेन्सो कॉर्प के साथ एक संयुक्त उद्यम में बैटरी विनिर्माण संयंत्र गुजरात में स्थापित कर रही है.

 

सुजुकी द्वारा शुरू किए जाने वाले नए इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए गुजरात संयंत्र में बनने वाली बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी 2020 तक भारत में कई दोपहिया वहां लॉन्च करने जा रही है. देश के लगभग सभी इलेक्ट्रिक वाहन आयातित बैटरी पर चलते हैं, जो ज्यादातर चीन से मंगाए जाती है. माना जा रहा है कि मारुति सुजुकी बड़े पैमाने पर अपनी गाड़ियों में लिथियम-आयन बैटरी प्रदान करने वाला पहला निर्माता होगा.

 

वर्तमान में लीड बैटरी 10,000-12,000 के लिए उपलब्ध है, जबकि लिथियम-आयन बैटरी ₹ 16,000-17,000 के आसपास खर्च करती है. हालांकि एक लीड बैटरी का केवल एक वर्ष का जीवन चक्र होता है जबकि लिथियम-आयन पांच साल तक चलती है.

लीड की कीमतें हर दिन लगातार बढ़ रही हैं जो 120 डॉलर 2021 होने की उम्मीद है. जानकारों का मानना है कि अगर मारुति अपनी कारों में ये बैटरी लगाती है तो मारुति सुजुकी कारों की संख्या के कारण लागत का लाभ बहुत बड़ा होगा. इसके अलावा कंपनी हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है जहां इन बैटरी की आवश्यकता होगी.

केंद्र सरकार भी पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इनवर्टर और ऑटोमोबाइल में लीड का उपयोग काफी कम करना चाहता है. हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण के दूसरे चरण के लिए अपने मसौदे में लीड बैटरी के साथ लगाए गए वाहनों के लिए सब्सिडी वापस ले ली गई है. टोयोटा वैश्विक स्तर पर सुजुकी के साथ शामिल है, भारत में टोयोटा द्वारा निर्मित हाइब्रिड वाहनों को इन बैटरी को भी आपूर्ति कर सकते हैं.

First published: 13 July 2018, 13:45 IST
 
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