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अमेरिकी कंपनी Mastercard का दर्द- मोदी राष्ट्रवाद का सहारा लेकर पहुंचा रहा हैं नुकसान

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 November 2018, 16:29 IST

मास्टरकार्ड (Mastercard) ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी घरेलू पेमेंट नेटवर्क RuPay के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का इस्तेमाल कर रहे हैं. मास्टरकार्ड ने कहा कि नई दिल्ली की संरक्षणवादी नीतियां विदेशी भुगतान कंपनियों को नुकसान पहुंचा रही हैं. गौरतलब है कि हालही में पीएम मोदी ने भारत के पेमेंट नेटवर्क रुपे (RuPay) का समर्थन किया था.

भारत में हालही के वर्षों में RuPay की वृद्धि ने मास्टरकार्ड और visa जैसे अमेरिकी पेमेंट दिग्गजों के प्रभुत्व को कमजोर कर दिया है. आंकड़ों की माने तो भारत में कुल लगभग एक अरब डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स में से आधे अब RuPay भुगतान प्रणाली के माध्यम से इस्तेमाल किये जा रहे हैं. जिसका मतलब है कि मास्टरकार्ड जैसी दुनिया की सबसे बड़ी पेमेंट कंपनी के विस्तार में यह रुकावट डाल रही है.

पीएम मोदी की बात का हवाला देते हुए लिखित रूप से मास्टरकार्ड ने 21 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय को बताया प्रधानमंत्री राष्ट्रवाद से जोड़कर रुपे कार्ड के उपयोग का दावा करते हुए इसे'राष्ट्रीय सेवा की तरह' बता रहे हैं. ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी को मास्टर कार्ड उपाध्यक्ष ने अपने पत्र में इसका जिक्र किया है.

इसमें कहा गया है कि भारत में अमेरिकी कंपनियां मोदी की नीतियों से जूझ रही हैं, वे इसे संरक्षणवादी मानते हैं. इस साल अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने एक भारतीय कानून के खिलाफ विरोध किया था जिसके तहत उन्हें स्थानीय रूप से अधिक डेटा स्टोर करने की आवश्यकता होगी, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी.

मास्टरकार्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी भारत में जन्मे अजय बंगा है. कंपनी ने 2014 से 2019 के लिए अपने प्रमुख भारतीय बाजार में 1 बिलियन डॉलर का एक योजनाबद्ध निवेश किया. भारत में इसके 2,000 कर्मचारी हैं. मास्टरकार्ड का भारत में वर्कफाॅर्स इसके ग्लोबल वर्कफोर्स का 14 प्रतिशत है, जो अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा है. कंपनी ने इस साल बॉलीवुड एक अभिनेता इसमें शामिल किया था. जिसका उद्देश्य भारत के छोटे शहरों में लोगों को डेबिट कार्ड का उपयोग के लिए प्रत्साहित करना था.

गौरतलब है कि नवंबर 2016 में पीएम मोदी ने ब्लैक अर्थव्यवस्था पर ख़त्म करने के उद्देश्य से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए थे. जसके बाद भारत में डिजिटल लेनदेन में इजाफा हुआ था. यही कारण है कि भारतीयों ने बीते साल अगस्त में डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर 51 अरब डॉलर का ट्रांजेक्शन किया.

यही नहीं विदेशी कार्ड कंपनियों को मोबाइल वॉलेट और राज्य समर्थित डिजिटल मनी ट्रांसफर सेवाओं के बढ़ते उपयोग का भी सामना करना पड़ा है. RuPay को को भारत में सबसे ज्यादा बढ़ावा साल 2014 से मिलना शुरू हुआ जब पीएम मोदी के जनधन योजना शुरू की.

First published: 2 November 2018, 14:57 IST
 
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