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पराली जलाने लिए तैयार था ये मास्टरप्लान, RBI के एक आदेश ने अटका दिया राह में रोड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 November 2019, 15:39 IST

दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. प्रदूषण का एक मुख्य कारण उत्तर भारत के खेतों में किसानों द्वारा जलाये जाने वाले हजारों टन कृषि अपशिष्ट भी माने जा रहे हैं.  एक रिपोर्ट की माने तो इस समस्या का समाधान संभव था यदि इन अपशिष्टों को जैव ईंधन में बदलने की महत्वाकांक्षी परियोजना गति मिल पाती.

कई तेल विपणन कंपनियां जैसे कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने 2016 से 2017 के बीच 2G इथेनॉल या बायो-रिफाइनरियों की स्थापना का निर्णय लिया था लेकिन वह सके लिए वित्तीय पोषण करने में विफल रहे. हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश पर कई कर्जदाताओं ने यह निर्देश दिया कि वाणिज्यिक बैंकों द्वारा एकल उधारकर्ता जोखिम की सीमा तय की जाए.

प्रस्तावित 2 जी इथेनॉल संयंत्र इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा था. कटाई के बाद बचे गैर-खाद्य कृषि कचरे का उपयोग करके 2 जी इथेनॉल का उत्पादन किया जाता है. इसमें मकई के गोले, चावल के भूसे और गेहूं के भूसे शामिल हैं, जो सेलूलोज़ में बदल जाता है, जिससे बाद में इथेनॉल बनाया जाता है.

आईओसीएल को हरियाणा और गुजरात में एक-एक बायो-रिफाइनरी स्थापित करनी थी, एचपीसीएल ने ओडिशा के बरगढ़ जिले में बठिंडा और बीपीसीएल में एक स्थापित करने का फैसला किया था. एक अधिकारी ने कहा एक रिपोर्ट के अनुसार इन जैव-रिफाइनरियों के निर्माण की योजना चालू है लेकिन 10 वर्षों के लिए 100% से अधिक की आयल कंपनियों से गारंटी के बावजूद प्रगति धीमी हो गई है. आज बैंकर ऋण वित्तपोषण जारी नहीं कर रहे हैं.

रिफाइनरी के लिए कच्चे माल के परिवहन की लागत को कम करने के लिए इन प्लांट्स को खेतों के करीब स्थानों पर आना था. ओएमसी ने खेतों के करीब एक ब्लेंडिंग रिफाइनरी या डिपो स्थापित करने की योजना बनाई है. दूसरी ओर बैंकों का कहना है कि जब तक वे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ऋण देने के लिए हाल ही में RBI के एक निर्देश से बाध्य हैं.

सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने और तेल आयात बिल को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है. नई बायोफ्यूल नीति 2018 देश में इथेनॉल के निर्माण के लिए फीडस्टॉक के अलावा अन्य गुड़ के उपयोग की अनुमति देती है. इसमें गन्ने का रस, कृषि अपशिष्ट, मक्का, अधिशेष खाद्यान्न शामिल हैं. नीति ने 2030 तक पेट्रोल के साथ 20% इथेनॉल सम्मिश्रण प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है.

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First published: 5 November 2019, 15:43 IST
 
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