Home » बिज़नेस » Maternity Perks May cost 1.8 million women their jobs in India
 

मोदी सरकार के मातृत्व कानून में बदलाव से 18 लाख महिलाओं की नौकरी पर संकट

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2018, 17:03 IST

सरकार ने महिलाओं को अपने करियर और नौकरियों में महिलाओं की संख्या को बढ़ावा देने के लिए भले ही मातृत्व अवकाश के संबंध में नया कानून बनाया हो, लेकिन इस का विपरीत असर महिलाओं के करियर पर पड़ने की संभावना है. इस बात का खुलासा एक सर्वे में हुआ है.

टीम लीज सर्विसेज लिमिटेड ने मंगलवार को एक सर्वे के आधार पर बताया कि जो कानून भारत को कनाडा और नॉर्वे के बाद महिलाओं को श्रमिकों में रहने के सक्षम बनाता है, वही शायद उनकी नौकरी के नुकसान की वजह बन जाएगा. यही नहीं इससे महिलाओं छोटे व्यवसायों में स्टार्ट अप में भर्ती ना होने का कारण बन जाएगा. सर्वे के मुताबिक 10 सेक्टर में वित्तीय वर्ष मार्च 2019में अनुमानित 11 लाख से 18 लाख महिलाएं अपनी नौकरी खो देंगी

वहीं स्टाफिंग और मानव संसाधन कंपनियों के मुताबिक अगर सभी क्षेत्रों में इसकी गिनती की जाती है तो ये संख्या 1 करोड़ से 1 करोड़ 20 लाख तक पहुंच सकती है. ये किसी देश के लिए बहुत बुरी खबर हो सकती है, जहां वित्तीय वर्ष 2016 में नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 24 फीसदी तक कम हो गई, जो एक दशक पहले 36 फीसदी हुआ करती थी. मैककिंसे एंड कंपनी का अनुमान है कि 2025 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में 700 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की जा सकती थी अगर नौकरियों में और अधिक महिलाएं होतीं.

टीम लीज सर्विसेज के को-फाउंडर ऋतुपरना चक्रवर्ती कहते हैं कि शायद भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं की जा सकती, क्योंकि हमारे पास दुनिया में सबसे कम कर्मचाारियों की भागेदारी दर है. चक्रवर्ती आगे कहते हैं कि महिलाओं नौकरियों की ओर अधिक आकर्षित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों की जरूरत हैं.

चक्रवर्ती बताते हैं कि, ब्रिटेन में महिलाओं को 52 सप्ताह का मातृत्व अवकाश लेने का विकल्प है, हालांकि 52 सप्ताह तक कर्मचारियों को भुगतान करने का बोझ कंपनी के ऊपर नहीं होता.

बता दें कि ये सर्वे विमानन, सूचना प्रोद्योगिकी, आईटी, रियल एस्टेट, शिक्षा, -कॉमर्स, मैन्युफेक्चरिंग, बैंकिंग और फाइनेंशियल के साथ-साथ रिटेल और टूरिज्म जैसी 300 कंपनियों के बीच किया गया. इससे पता चलते है कि बड़ी और व्यावसायिक कंपनियां सुधार उपायों को वापस लाएंगी. यही वजह है कि पूरी तरह नियोक्ता पोषित छोटी कंपनियां और मध्यम आकार कंपनियां महिलाओं को भर्ती करने का विरोध करती हैं.

बता दें कि पिछले साल मोदी सरकार ने संगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश संबंधी नया कानून पेश किया था. जिसमें मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें- अटलांटिक में उठा तूफ़ान भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहुंचा सकता है आसमान पर

First published: 27 June 2018, 16:13 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी